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Sunday, October 25, 2026
Homeउत्तराखण्डअतिवृष्टि से चमोली के नारायणबगड़ में भारी तबाही

अतिवृष्टि से चमोली के नारायणबगड़ में भारी तबाही

चमोली। भारी बारिश ने चमोली जिले के विकासखंड नारायणबगड़ के मुख्य बाजार में भारी तबाही मचा दी है। अतिवृष्टि के चलते पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर बाजार क्षेत्र में आ गए। इससे कई दुकानों के अंदर मलबा भर गया। सड़क पर खड़े वाहन भी इसकी चपेट में आ गए। मलबा आने से राष्ट्रीय राजमार्ग भी बाधित हो गया, जिससे यातायात प्रभावित रहा। बारिश के कारण राजकीय इंटर कॉलेज नारायणबगड़ परिसर में भी भारी मात्रा में मलबा घुस गया। इससे विद्यालय परिसर को नुकसान पहुंचा है। स्थानीय लोगों और व्यापारियों को रातभर भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अतिवृष्टि से हुए नुकसान की सूचना मिलते ही प्रशासन सक्रिय हुआ। क्षेत्रीय विधायक ने बताया कि सूचना प्राप्त होते ही सीमा सड़क संगठन को तत्काल राष्ट्रीय राजमार्ग से मलबा हटाकर यातायात सुचारू करने तथा राजकीय इंटर कॉलेज और प्रभावित दुकानदारों के परिसरों से भी मलबा साफ कराने के निर्देश दिए गए हैं।
विधायक ने कहा कि आपदा की इस घड़ी में सरकार प्रभावित दुकानदारों और क्षेत्रवासियों के साथ खड़ी है तथा हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। प्रशासन की टीमें भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और नुकसान का आकलन किया जा रहा है। उत्तराखंड के चमोली जिले में मानसून की दस्तक से पहले ही बारिश ने खतरे की घंटी बजा दी है। थराली विधानसभा क्षेत्र के नारायणबगड़ में देर रात हुई मूसलाधार बारिश के बाद भारी मात्रा में मलबा बाजार और राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ गया। कई वाहन मलबे की चपेट में आ गए, स्कूल और दुकानों में भी मलबा घुस गया। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। प्रशासन और बीआरओ ने मौके पर पहुंचकर राहत एवं मार्ग खोलने का कार्य शुरू कर दिया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह समस्या नई नहीं है। पिछले आठ से दस वर्षों से हर बरसात में इसी स्थान पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर गिरते हैं, जिससे लैंडस्लाइड जैसी स्थिति बन जाती है। सबसे गंभीर बात यह है कि इसी स्थान पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नारायणबगड़ स्थित है, जो पूरे क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद अब तक यहां स्थायी सुरक्षा कार्य या ढलान उपचार नहीं किया गया, जिससे हर मानसून में लोगों की जान और संपत्ति पर खतरा बना रहता है।
चमोली जिला पहले से ही आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। पिछले वर्ष थराली और चेपड़ों क्षेत्र में आई भीषण आपदा में कई दुकानें मलबे में दब गई थीं और लोगों की आजीविका पूरी तरह प्रभावित हुई थी। चेपड़ों गांव के गंगादत्त जोशी आपदा में बह गए थे, जिनका शव आज तक बरामद नहीं हो सका। इसी को देखते हुए स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि थराली क्षेत्र में मानसून के दौरान एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की स्थायी टीम तैनात की जाए, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर लोगों की जान बचाई जा सके।
फिलहाल प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और हाईवे को पूरी तरह सुचारू करने का कार्य जारी है। लेकिन मानसून की शुरुआत से पहले ही सामने आए इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में आपदा प्रबंधन की तैयारियों और स्थायी सुरक्षा कार्यों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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