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Thursday, July 23, 2026
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देहरादून से उठा संस्कृति और संस्कारों का शंखनाद-मातृशक्ति को सीएम धामी का नमन

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राजकीय दून मेडिकल कॉलेज, पटेल नगर, देहरादून में विश्वमांगल्य सभा के तत्वाधान में आयोजित ‘मातृ संस्कार समागम’ कार्यक्रम में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई मातृशक्ति का अभिनंदन करते हुए उनके प्रति सम्मान प्रकट किया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने बचपन और निजी जीवन के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका जीवन किसी विशेष सुविधा या संसाधनों से नहीं, बल्कि संघर्ष, अनुशासन और संस्कारों की पूंजी से बना है। साधारण परिवार में पले-बढ़े होने के कारण उन्होंने प्रारंभ से ही मेहनत, ईमानदारी और आत्मनिर्भरता का महत्व समझा। उन्होंने बताया कि सीमित संसाधनों के बीच बड़े सपने देखने और उन्हें साकार करने का संकल्प ही उनके व्यक्तित्व की असली ताकत बना। मुख्यमंत्री ने कहा कि साधारण जीवन शैली ने उन्हें जमीन से जुड़े रहने की सीख दी। सादगी, संयम और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना ने उनके विचारों और निर्णयों को आकार दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जीवन में ऊँचा पद या प्रतिष्ठा नहीं, बल्कि मजबूत चरित्र और स्पष्ट उद्देश्य ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। यही मूल्य आज भी उनके हर निर्णय और कार्यशैली का आधार हैं।
मुख्यमंत्री श्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि यह उनका सौभाग्य है कि उन्हें इस विशेष कार्यक्रम के माध्यम से प्रदेशभर से पधारी माताओं और बहनों के बीच उपस्थित होने का अवसर प्राप्त हुआ। मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता व्यक्त की कि इस आयोजन के माध्यम से देश-प्रदेश के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक क्षेत्रों में कार्यरत परिवारों की मातृशक्ति, विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाली नारीशक्ति तथा प्रदेश की बेटियों के साथ सार्थक संवाद स्थापित किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह आयोजन समाज और राष्ट्र के विकास में मातृशक्ति की भूमिका को और अधिक सशक्त एवं व्यवहारिक रूप से समझने की दिशा में महत्वपूर्ण सिद्ध होगा।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए गीता धामी ने कहा कि सामाजिक सेवा ही मानवीय जीवन का मूल है और जब सेवा किसी परिवार की परंपरा बन जाती है तो उसका प्रभाव केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह पूरे समाज की चेतना को जागृत करता है। उन्होंने कहा कि हमारी सनातन संस्कृति में ‘सेवा परमो धर्मः’ का भाव केवल शब्दों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन की वास्तविक साधना है। उन्होंने उपस्थित सेवा-समर्पित परिवारों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे परिवारों ने सेवा को अपने जीवन का संस्कार बनाया है। जब परिवार के सदस्य समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के प्रति संवेदनशील होते हैं और जरूरतमंदों के दुःख को अपना दुःख समझते हैं, तभी समाज में करुणा, समरसता और मानवीय मूल्यों की स्थापना संभव होती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सप्त मातृ शक्ति सम्मान के तहत 7 विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली ममता राणा, ममता रावत, शैला ब्रिजनाथ, साध्वी कमलेश भारती, राजरानी अग्रवाल, मन्जू टम्टा व कविता मलासी को सम्मानित किया। कार्यक्रम में विश्वमांगल्य सभा के पदाधिकारी प्रशांत हरतालकर, डॉ. वृषाली जोशी, पूजा माधव, अनुराधा यादव, विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आई महिलाए, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

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