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Saturday, November 7, 2026
Homeउत्तराखण्डप्रदेशभर में धूमधाम से संपन्न हुई गोवर्धन पूजा

प्रदेशभर में धूमधाम से संपन्न हुई गोवर्धन पूजा

देहरादून। राजधानी के जीएमएस रोड निवासी पुंडीर परिवार कई सालों से बिना दूध देने वाली गाय को भी संरक्षण दे रहे हैं। यह परिवार गाय की सेवा करने को अपना कर्तव्य तो मानता ही है, लेकिन दुधारू गायों से निकले दूध को आर्थिक लाभ के लिए बेचना भी पसंद नहीं करता है। सभी गायों से निकले दूध को रोजाना अपने कर्मचारियों को निशुल्क वितरित कर दिया जाता है।
उत्तराखंड में गोवर्धन पूजा पर्व धूमधाम से मनाया गया। राजधानी में एक परिवार ऐसा भी है जो निस्वार्थ भाव से गोवंश की देखरेख और सेवा करता है। इस परिवार का गो प्रेम देखते ही बनता है। बीते कई सालों से इस परिवार ने गायों के रहने के लिए अपने आवास में साफ़ सुथरी व्यवस्था की है। उनके भोजन से लेकर स्वास्थ्य का ध्यान भी यह परिवार लगातार रखता आ रहा है। यह परिवार कई सालों से दूध नहीं देने वाली गायों को भी संरक्षण देता आ रहा है।
मंगलवार 21 अक्टूबर को लोगों ने गोवंश की पूजा करके देश और प्रदेश की सुख समृद्धि की कामना की। दूसरी तरफ पुंडीर परिवार ऐसी गायों की पूजा कर रहा है, जो दूध देने में भी अब सक्षम नहीं हैं। अक्सर दूध नहीं देने वाली गाय को लोग छोड़ या बेच देते हैं, क्योंकि गाय फायदेमंद सौदा नहीं रहती है। लेकिन जीएमएस रोड के रहने वाले जोगेंद्र पुंडीर का कहना है कि गाय की पूजा करना एक धार्मिक पर्व ही नहीं बल्कि गो सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देना है। उन्होंने बताया कि गाय को देवी लक्ष्मी का स्वरूप भी माना जाता है और इस पर्व का उद्देश्य समाज में सेवा सह अस्तित्व और संतुलन की भावना को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि उनकी गोशालाओं में ऐसी कई गायें हैं, जिन्होंने दूध देना छोड़ दिया है। चाहे गाय दूध दे या फिर ना दे, यह दर्शाता है कि गाय की उपयोगिता केवल दूध देने तक सीमित नहीं है।
ऐसे में यह परिवार गोवंश संरक्षण का एक उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहां उनको व्यावसायिक लाभ नहीं पहुंच रहा है। आर्थिक लाभ की परवाह किए बगैर उन गायों की भी ऐसी देखभाल की जा रही है, जिनकी उम्र 20 साल से अधिक हो गई है, और ऐसी गाय जो दूध देने में सक्षम नहीं है। इस तरह की गायों को भी उतना ही सम्मान मिल रहा है, जितना दूध देने वाली गायों को मिलता है।
पुंडीर परिवार दूध नहीं देने वाली गायों को भी अपने परिवार का हिस्सा मानता है और उनकी इतनी देखभाल करता है कि जैसे गाय में देवी लक्ष्मी का वास हो। जानवरों के प्रति लगाव के चलते देहरादून का यह परिवार शुष्क गायों की उतनी ही देखभाल कर रहा है, जैसी देखभाल दूध देने वाली गायों की होती है।

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