Latest news
78 वृद्ध महिलाओं का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण, दवाइयां और सहायक उपकरण वितरित दिव्यांगजनों के लिए रोजगार के नए अवसर, 23 अभ्यर्थी शॉर्टलिस्ट उत्तराखण्ड वित्त सेवा संवर्ग के छह अधिकारियों का चयन वेतनमान में हुयी पदोन्नति एफडीए की बड़ी कार्रवाई, कोर्ट कैंटीन से ढाबों तक छापेमारी, कई प्रतिष्ठानों को नोटिस प्रदेश में 23 अक्टूबर से शुरु होगी ईवीएम मशीनों की प्रथम स्तरीय जांच विकास परियोजनाओं की बाधाओं को दूर करने के लिए विभागीय समन्वय एवं समयबद्ध कार्यवाही पर जोर मुख्यमंत्री ने गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी लोकभाषाओं के वॉइस कलेक्शन पोर्टल का किया शुभारंभ मुख्यमंत्री ने यूपीईएस के 24वें दीक्षांत समारोह में किया प्रतिभाग मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक 23 अक्टूबर से उत्तराखण्ड में फिर मौसम के करवट लेने के आसार

[t4b-ticker]

Friday, October 23, 2026
Homeउत्तराखण्ड“ब्लू इकोनॉमी” और वैश्विक मत्स्य उत्पादन क्षमता को लेकर पत्रकारों ने किया...

“ब्लू इकोनॉमी” और वैश्विक मत्स्य उत्पादन क्षमता को लेकर पत्रकारों ने किया अवलोकन

देहरादून। बुधवार को भुवनेश्वर, ओडिशा स्थित केंद्रीय मीठे जल मत्स्य पालन संस्थान (सीआईएफए) में उत्तराखंड के मीडिया प्रतिनिधिमंडल ने अध्ययन दौरा किया। यह अध्ययन दौरा भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अंतर्गत प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) देहरादून द्वारा आयोजित किया गया। जिसमें 13 वरिष्ठ पत्रकारों ने भाग लिया। दल का नेतृत्व पीआईबी देहरादून के असिस्टेंट डायरेक्टर संजीव सुन्द्रियाल ने किया। इस दौरान पीआईबी ओडिशा के असिस्टेंट डायरेक्टर महेंद्र जेना भी उपस्थित रहे।
पत्रकारों ने आधुनिक मत्स्य पालन पद्धतियों का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। वैज्ञानिकों ने बताया कि किस प्रकार नियंत्रित वातावरण में गर्म पानी के माध्यम से अधिक उत्पादन और बेहतर गुणवत्ता की मछलियों का पालन किया जा रहा है। यह मॉडल ओडिशा को देश के अग्रणी मत्स्य उत्पादक राज्यों में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
निदेशक, आईसीएआर-सीफा डॉ. प्रमोद कुमार साहू ने बताया कि सीआईएफए देश में ताजे पानी की मत्स्य पालन तकनीकों के विकास का प्रमुख केंद्र है। उन्होंने कहा कि संस्थान द्वारा विकसित तकनीकें कम लागत में अधिक उत्पादन देने में सक्षम हैं और इन्हें देश के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में अपनाया जा सकता है। इस दौरान एक्वाकल्चर प्रोडक्शन एंड एनवायरमेंट के वैज्ञानिक डॉ. प्रताप चंद्र दास ने पत्रकारों को विशेष रूप से “चीतल मछली” के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह मछली अत्यंत स्वादिष्ट होती है और स्थानीय बाजार में इसकी कीमत लगभग 1600 प्रति किलोग्राम तक पहुंचती है। चीतल मछली आमतौर पर 4 से 5 किलोग्राम तक की होती है और इसमें कांटे अधिक होते हैं, फिर भी ओडिशा के लोग इसे बड़े रुचि से खाते हैं। यह उच्च मूल्य वाली मछली राज्य के मत्स्य व्यवसाय को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही है। फिश न्यूट्रीशन से जुड़े पहलुओं पर शिव शंकर गिरि ने जानकारी दी कि संतुलित आहार और वैज्ञानिक प्रबंधन से मछलियों की गुणवत्ता, स्वाद और उत्पादन तीनों को बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ब्प्थ्। द्वारा विकसित न्यूट्रीशन मॉडल किसानों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहे हैं। अध्ययन के दौरान पत्रकारों ने “ब्लू इकोनॉमी” और भारत की वैश्विक मत्स्य उत्पादन क्षमता को लेकर महत्वपूर्ण सवाल भी उठाए। वैज्ञानिकों ने बताया कि यदि आधुनिक तकनीकों और प्रशिक्षण को व्यापक स्तर पर लागू किया जाए, तो भारत वैश्विक स्तर पर मछली उत्पादन और निर्यात में अग्रणी देशों में शामिल हो सकता है। इस अध्ययन दौरे का एक महत्वपूर्ण पहलू उत्तराखंड और ओडिशा के मत्स्य पालन मॉडल का तुलनात्मक अध्ययन भी रहा। जहां ओडिशा में बड़े पैमाने पर गर्म पानी आधारित मत्स्य पालन किया जाता है और यह उत्पादन में अग्रणी है, वहीं उत्तराखंड में ठंडे पानी की उच्च मूल्य वाली मछलियों, विशेषकर ट्राउट, के माध्यम से गुणवत्ता आधारित मत्स्य पालन तेजी से विकसित हो रहा है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments