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Sunday, September 13, 2026
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हिंदी और भारतीय भाषाओं में निहित है विकसित भारत का भविष्यः डॉ. निशंक

देहरादून। गुजरात साहित्य अकादमी, गांधीनगर द्वारा शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास, नई दिल्ली के सहयोग से स्टेच्यू ऑफ यूनिटी परिसर, नर्मदा में 28-29 अप्रैल 2026 को आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यक्रम भारतीय भाषा संगम 2.0 का सफलतापूर्वक समापन हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय “विकसित भारत का सांस्कृतिक संदर्भरू भारतीय भाषाओं की भूमिका” रहा, जिसमें देशभर से 300 से अधिक भाषाविदों, शिक्षाविदों एवं भाषा विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
समापन समारोह के मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री एवं लेखक गाँव के संस्थापक डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने प्रेरणादायक संबोधन में कहा कि नई शिक्षा नीति भारतीय भाषाओं को सशक्त करने की दिशा में एक ठोस आधारशिला है। उन्होंने आगे कहा कि हिंदी सहित सभी भारतीय भाषाएँ ही विकसित भारत के सपने को साकार करने में वास्तविक शक्ति बनेंगी।
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि भारतीय भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि देश की सांस्कृतिक आत्मा और ज्ञान परंपरा की वाहक हैं। आगे उन्होंने कहा कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर ज्ञान-समृद्ध राष्ट्र बनाना है, तो मातृभाषाओं और क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा, शोध और नवाचार को बढ़ावा देना अत्यंत आवश्यक है। साथ ही, हिन्दी और भारतीय भाषाओं के माध्यम से युवाओं में आत्मगौरव और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना विकसित होगी, जो राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में विभिन्न सत्रों के माध्यम से भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और आपसी समन्वय पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया। गुजरात साहित्य अकादमी ने इस आयोजन के माध्यम से भाषाई एकता और सांस्कृतिक समृद्धि की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है। इस अवसर पर डॉ. भाग्येश झा (अध्यक्ष, गुजरात साहित्य अकादमी), डॉ. जयेंद्र सिंह जादव (महासचिव, गुजरात साहित्य अकादमी), ए. विनोद (राष्ट्रीय संयोजक, शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास), डॉ अनिल जोशी, श्रीमती स्वारंगी साने एवं डॉ. सूर्यदेव राम जी सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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