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Monday, October 26, 2026
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हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताः सचिन कुर्वे

देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के दिशा-निर्देशों में उत्तराखंड का स्वास्थ्य विभाग भीषण गर्मी और संभावित हीट वेव से निपटने के लिए पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी एडवाइजरी के तहत सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों की रोकथाम और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। भारतीय मौसम विभाग द्वारा इस बार सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद राज्य सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए समय रहते व्यापक रणनीति लागू कर दी है, ताकि जनहानि को न्यूनतम रखा जा सके और स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह तैयार रहें।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से जारी निर्देशों में सभी जिलाधिकारियों और मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को हीट-सम्बंधित बीमारियों की रोकथाम और प्रबंधन के लिए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा गया है। भारतीय मौसम विभाग द्वारा मार्च से मई के बीच सामान्य से अधिक तापमान की संभावना जताए जाने के बाद यह एडवाइजरी और भी अहम हो गई है। सरकार का लक्ष्य है कि समय रहते ठोस कदम उठाकर हीट स्ट्रोक और इससे होने वाली मौतों को न्यूनतम किया जा सके।
राज्य के जिला और उप-जिला अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष स्थापित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन कक्षों में मरीजों को तत्काल राहत देने के लिए कूलिंग सिस्टम, आइस पैक, ठंडे प्ट फ्लूइड और पर्याप्त वेंटिलेशन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। “पहले ठंडा करें, फिर परिवहन करें” प्रोटोकॉल को सख्ती से लागू करने पर जोर दिया गया है, ताकि गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सके। इसके अलावा व्त्ै, इलेक्ट्रोलाइट्स और अन्य जरूरी दवाओं की 100 प्रतिशत उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
हीट वेव के प्रभाव पर नजर रखने के लिए 1 मार्च 2026 से दैनिक रिपोर्टिंग अनिवार्य कर दी गई है। सभी जिला इकाइयों को प्भ्प्च् प्लेटफॉर्म पर हीट-सम्बंधित मामलों की रिपोर्ट अपलोड करनी होगी। मरीज-स्तर की जानकारी संकलित करने के साथ-साथ संदिग्ध मौतों की जांच और ऑडिट भी किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि डेटा की गुणवत्ता और समयबद्ध रिपोर्टिंग में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एडवाइजरी में शिशुओं, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बाहरी कार्य करने वाले श्रमिकों को सबसे अधिक जोखिम वाला वर्ग बताया गया है। इन समूहों के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं। लोगों को दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप से बचने, हल्के सूती कपड़े पहनने और नियमित रूप से पानी पीने की सलाह दी गई है। साथ ही ठंडे इलाकों से आने वाले लोगों को 10-15 दिन का अनुकूलन समय देने की बात भी कही गई है। गर्मी के दौरान होने वाले सामूहिक आयोजनों और खेल गतिविधियों के लिए भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। दोपहर के समय बाहरी कार्यक्रमों से बचने और हर व्यक्ति के लिए पर्याप्त पेयजल की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। बड़े आयोजनों में चिकित्सा टीमों की तैनाती, व्त्ै और आइस बॉक्स की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है। बढ़ते तापमान के साथ बिजली के उपकरणों पर लोड बढ़ने की संभावना को देखते हुए अस्पतालों में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं। आईसीयू सहित सभी संवेदनशील क्षेत्रों में विद्युत लोड ऑडिट, स्मोक डिटेक्टर और फायर फाइटिंग सिस्टम की कार्यशीलता सुनिश्चित करने को कहा गया है।
स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने कहा कि राज्य सरकार हीट वेव की चुनौती को लेकर पूरी तरह गंभीर है और सभी जिलों को समय रहते तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में हीटस्ट्रोक कक्ष, आवश्यक दवाओं की उपलब्धता और प्रशिक्षित चिकित्सा स्टाफ की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है। कुर्वे ने स्पष्ट किया कि हीट-सम्बंधित बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए निगरानी तंत्र को और मजबूत किया गया है और सभी जिलों से रोजाना रिपोर्ट मांगी जा रही है। उन्होंने आम जनता से भी अपील की कि वे स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें, विशेषकर दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। कुर्वे ने कहा कि सामूहिक प्रयासों से ही इस चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है। एनएचएम के मिशन निदेशक मनुज गोयल ने बताया कि हीट वेव से निपटने के लिए राज्यभर में माइक्रो-लेवल प्लानिंग की जा रही है। सभी स्वास्थ्य इकाइयों को अलर्ट पर रखा गया है और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्भ्प्च् पोर्टल के माध्यम से रियल-टाइम निगरानी की जा रही है, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई संभव हो सके। गोयल ने कहा कि जागरूकता ही बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है और इसके लिए व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, ताकि लोग समय रहते सावधानी बरत सकें।

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