Latest news
नीट यूजी एबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट मामले में हुई पहली गिरफ्तारी नशा मुक्त भारत अभियान के तहत यूपीईएस में छात्रों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति किया जागरूक राज्य आंदोलनकारियों के चिन्हीकरण को हुई समिति की बैठक मुख्यमंत्री ने विभिन्न विकास योजनाओं के लिए 16.88 करोड़ की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की अत्याचार से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति को समय पर न्याय, सुरक्षा और सम्मान मिलेः मुख्यमंत्री सेवा संकल्प अभियान के तहत पौड़ी जनपद के 1853 आंगनबाड़ी केंद्रों में आयोजित होगा “आंगन का मिलन” कार्यक्... मंत्री सुबोध उनियाल की पहल से टिहरी के मांगला गांव में हेलीपैड निर्माण को 45.40 लाख की वित्तीय स्वीक... धामी के विजन से एमडीडीए ने बदली आईएसबीटी की सूरत नये डाटा बेस सेंटर को अत्याधुनिक तकनीकों से लेस करने के मंत्री ने दिए निर्देश मजबूत एम-पैक्स से गांव मजबूत होंगे और मजबूत गांवों से समृद्ध उत्तराखण्ड बनेगाः मुख्यमंत्री

[t4b-ticker]

Tuesday, September 22, 2026
Homeउत्तराखण्डनीट यूजी एबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट मामले में हुई पहली गिरफ्तारी

नीट यूजी एबीबीएस फर्जी सर्टिफिकेट मामले में हुई पहली गिरफ्तारी

देहरादून। नीट यूजी में फर्जी सर्टिफिकेट मामले में जांच कर रही एसआईटी टीम ने पहली दो गिरफ्तारी कर ली हैं। मंगलवार को 10 सदस्यीय एसआईटी टीम स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के नाम पर बने फर्जी सर्टिफिकेट से एमबीबीएस और बीडीएस में एडमिशन लेने वाले आरोपियों की जांच के लिए हरिद्वार पहुंची थी। उधर दो आरोपियों को पूछताछ के लिए देहरादून के रायपुर थाने बुलाया गया था। पूछताछ के बाद वहीं दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
इस मामले में देहरादून एसएसपी और एसआईटी टीम ने देहारादून में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके एबीबीएस सर्टिफिकेट फ्रॉड में पहली गिरफ्तारियों का खुलासा किया है। अब तक गिरोह के सरगना रूपेश पंडित ओर अरविंद कुमार को अरेस्ट किया गया है। एसआईटी ने खुलासा किया है कि फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 45 लाख रुपए में सौदा हुआ था। तीन लोगों ने एडवांस के तौर पर 20 लाख रुपए दिए थे। 12 आरोपी अभी भी संदिग्ध हैं, जिनकी जांच की जा रही है। एसआईटी के अनुसार आरोपी अरविंद कुमार ने खुलासा किया कि उसने अपनी बेटी के फर्जी सर्टिफिकेट बनाने के लिए 20 लाख रुपए दिए थे। अरविंद की बेटी के खिलाफ भी थाना रायपुर में मुकदमा दर्ज हुआ था।
उत्तराखंड का एमबीबीएस फर्जीवाड़ा नीट-यूजी काउंसलिंग के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित और अन्य स्थानीय आरक्षण कोटे का लाभ लेने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने और उनके जरिए मेडिकल कॉलेजों में दाखिला पाने का मामला है। ऐसा आरोप है कि कुछ अभ्यर्थियों ने मृत या अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के फर्जी आश्रित प्रमाण पत्र बनवाकर राज्य कोटे की आरक्षित एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर प्रवेश हासिल किया। जांच में सामने आया कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में एक ही स्वतंत्रता सेनानी के नाम और जाली दस्तावेजों का उपयोग करके कई अलग-अलग अभ्यर्थियों ने खुद को उनका पोता व आश्रित बताकर कोटे का लाभ ले लिया। दिलचस्प बात ये है कि असली परिवार ने ऐसे किसी लाभ का दावा ही नहीं किया था। यहां तक कि फर्जी प्रमाण पत्रों पर एआई-जनरेटेड तस्वीरों का भी इस्तेमाल किया गया।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments