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Thursday, October 22, 2026
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सूबे के शत-प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में बनेंगे बालिका शौचालयः डॉ. धन सिंह

देहरादून। सूबे के शत प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में बालिका शौचालय बनाये जाएंगे ताकि यहां पढ़ने वाली बेटियों को शौचालय की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा। प्रदेश में शौचालय विहीन रह गये 141 प्राथमिक विद्यालयों में सुरक्षित टॉयलेट को राज्य सरकार ने 5.34 करोड़ की धनराशि आवंटित कर दी है। विभागीय अधिकारियों को इन विद्यालयों में मार्च माह तक शत-प्रतिशत बालिका शौचालय के निर्माण का लक्ष्य दिया गया है, साथ ही जिन विद्यालयों में शौचालय निष्क्रिय पड़े हैं उन्हें शीघ्र चालू करने को कहा गया है।
विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने मीडिया को जारी बयान में कहा कि प्रदेश सरकार स्कूलों में छात्र-छात्राओं को सभी आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। विद्यालयों में फर्नीचर, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों के लिए घर से बाहर सुरक्षित शौचालय की व्यवस्था सबसे बड़ी आवश्यकता होती है, इसलिए सरकार इस दिशा में विशेष प्राथमिकता के साथ कार्य कर रही है। डॉ. रावत ने कहा कि प्रदेश के 11 जनपदों के 141 राजकीय प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक विद्यालय बालिका शौचालय विहिन रह गये हैं। इन विद्यालयों में युद्ध स्तर पर बालिका शौचालयों का निर्माण किया जायेगा। जिसमें रूदप्रयाग व बागेश्वर जनपद में 7-7, पिथौरागढ़ व ऊधमसिंह नगर 6-6, नैनीताल 25, देहरादून 16, उत्तराकशी 10, चम्पावत 5, अल्मोड़ा 4, पौड़ी 2 जबकि टिहरी में सर्वाधिक 53 विद्यालयों में बालिका शौचालय बनाये जायेंगे। जिसके लिये 5 करोड़ 34 लाख 39 हजार की धनराशि आवंटित कर दी गई है। जिसमें रूद्रप्रयाग व बागेश्वर जनपद के लिये 26.53-26.53 लाख की धनराशि आवंटित की गई है। इसी प्रकार पिथौरागढ़ व ऊधमसिंह नगर के लिये 22.74-22.74 लाख, नैनीताल 94.75 लाख, देहरादून 60.64 लाख, उत्तरकाशी 37.90 लाख, चम्पावत 18.95 लाख, अल्मोड़ा 15.16 लाख पौड़ी 7.58 लाख तथा टिहरी जनपद को 2 करोड़ 87 हजार की धनराशि जारी कर दी गई है।
डॉ. रावत ने सभी जिलों के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मार्च माह के भीतर शौचालय निर्माण कार्य पूरा किया जाए और इसकी प्रगति रिपोर्ट निदेशालय को भेजी जाए। उन्होंने कहा कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही पाई जाती है तो संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी (बेसिक) इसकी जिम्मेदारी के लिए उत्तरदायी होंगे। विद्यालयी शिक्षा मंत्री ने यह भी बताया कि यू-डायस के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के राजकीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में 1640 बालक एवं बालिका शौचालय वर्तमान में निष्क्रिय पड़े हैं। इनमें 1560 प्राथमिक विद्यालयों में और 80 माध्यमिक विद्यालयों में हैं। उन्होंने सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि ऐसे सभी निष्क्रिय शौचालयों को आगामी 31 मार्च तक चालू कर छात्र-छात्राओं के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया जाए।

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