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Sunday, September 6, 2026
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अंकिता मर्डर केस: कांग्रेस ने लगाए जांच भटकाने का आरोप, वीआईपी की जानकारी के साथ की सीबीआई जांच की मांग

देहरादून: अंकिता भंडारी हत्याकांड के बाद से पुरे प्रदेशभर में आक्रोश का माहौल है I लोग आरोपियों को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने की मांग कर रहे है I वहीं दूसरी और इस मुद्दे पर अन्य राजनैतिक दल भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे है I इस बीच कांग्रेस ने अंकिता हत्याकांड की जांच को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सोमवार को संयुक्त रूप से पत्रकारों से बातचीत में सरकार पर जांच को भटकाने का आरोप लगाया।

उन्होंने आरोप लगाया कि अंकिता जिस रिसार्ट में काम कर रही थी, उसे घटना स्थल न मानकर बुलडोजर से क्षतिग्रस्त करना आगजनी साक्ष्यों से छेड़छाड़ का प्रयास है। रिसार्ट में बार-बार जाने वाले वीआइपी की जानकारी सामने आनी चाहिए। इस हत्याकांड की जांच सीबीआइ से कराई जानी चाहिए।

साक्ष्य दबाने का लगाया आरोप

इस मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने कहा कि साक्ष्य को दबाने का षडयंत्र किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन इस मामले में रसूखदारों को बचाने का प्रयास कर रही है। आरोपितों को पुलिस रिमांड पर न लेकर ज्यूडिशियल कस्टडी में लेना पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस पूरे प्रकरण की सीबीआइ से जांच कराने की मांग करती है।

पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि रिसार्ट को घटना स्थल के दायरे में नहीं रखना सवाल खड़े करता है। इस प्रकरण में आरोपित के परिवार के अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर बुलडोजर नहीं चलाया गया, लेकिन रिसार्ट पर तुरंत बुलडोजर चला दिया गया।

रिसार्ट के जिस कमरे में अंकिता रहती थी, उसे तोड़ना प्रशासन और पुलिस की नीयत पर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इंटरनेट मीडिया पर अंकिता के हवाले से चैट में किसी वीआइपी को अतिरिक्त सेवा देने का दबाव बनाने की बात सामने आई है। यह वीआइपी कौन है, मुख्यमंत्री को 24 घंटे के भीतर इस सच को सामने लाना चाहिए।

भाजपा के शासनकाल में यह तीसरा मामला

वहीं, कांग्रेस के अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट से विधायक मदन सिंह बिष्ट ने अंकिता हत्याकांड के बहाने सत्तारूढ़ दल भाजपा पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि भाजपा के शासनकाल में यह तीसरा प्रकरण है।

पहला प्रकरण भाजपा संगठन के एक नेता के विरुद्ध उनकी ही पार्टी की नेता ने उत्पीड़न का आरोप लगाने के रूप में सामने आया था। इसके बाद द्वाराहाट से भाजपा के पूर्व विधायक पर एक महिला ने यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। सरकार और सत्तारूढ़ दल ने इस मामले में डीएनए टेस्ट कराने की आवश्यकता तक महसूस नहीं की। अब अंकिता हत्याकांड में भी आरोपित सत्तारूढ़ दल से जुड़े रहे हैं।

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