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Thursday, July 23, 2026
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राज्य के सात उत्पादों को मिला भौगोलिक संकेतांक प्रमाण पत्र, कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया राज्य के लिए गौरव का विषय

देहरादून: बौद्विक सम्पदा भारत के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के उत्पादों के भौगोलिक संकेतांक(ज्योग्राफिकल इण्डिकेशन) का वितरण समारोह कार्यक्रम किया गया। सचिवालय स्थित वीर चन्द्र सिंह गढ़वाली सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल एवं उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने प्रतिभाग कर, राज्य के सात उत्पादों को भौगोलिक संकेतांक प्रमाण पत्र वितरित किये गए। वहीं कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के सलाहकार भास्कर खुल्बे एवं सचिव डीपीआईआईटी भारत सरकार व अनुराग जैन ने वीडियो कानफ्रेंस के माध्यम से प्रतिभाग किया।

राज्य के सात उत्पादों में ;कुमांऊ च्यूरा ऑयल, मुनस्यारी राजमा, उत्तराखण्ड का भोटिया दन, उत्तराखण्ड ऐंपण, उत्तराखण्ड रिंगाल क्राफ्ट, उत्तराखण्ड ताम्र उत्पाद एवं उत्तराखण्ड थुलमा को भौगोलिक संकेतांक प्रमाण पत्र वितरित किये गए।

इस अवसर पर कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि राज्य के लिए बहुत बड़े गौरव का विषय है कि यहां के मौलिक उत्पादों को वैश्विक पहचान मिलती जा रही है। कहा कि वोकल फॉर लोकल और स्थानीय प्रोडक्ट के प्रचार.प्रसार में जीआई टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। स्थानीय प्रोडक्ट को देश के साथ ही इंटरनेशनल मार्केट में पहचान दिलाने मे जीआई टैग महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड में और भी अनेक ऐसे परम्परागत कृषि उत्पाद है जो अपने भौगोलिक क्षेत्र विशेष के आधार पर लगातार वैश्विक पहचान बनाते जा रहे है। उत्तराखण्ड में कुल 6.48 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि हैं जिसमें 3.50 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल पर परम्परागत कृषि उत्पादों का उत्पादन हो रहा है। अभी तक तेजपत्ता प्रदेश का पहला जीआई टैग प्राप्त करने वाला उत्पाद था।

कृषि मंत्री ने कहा कि उपरोक्त के अतिरिक्त उत्तराखण्ड सरकार के निर्देशन पर उत्तराखण्ड लाल चावल, बेरीनाग चाय, उत्तराखण्ड गहत, उत्तराखण्ड मण्डुआ, उत्तराखण्ड झंगोरा, उत्तराखण्ड बुरांस सरबत, उत्तराखण्ड काला भट्ट, उत्तराखण्ड चौलाई. रामदाना, अल्मोड़ा लाखोरी मिर्च, उत्तराखण्ड पहाड़ी तोर दाल, उत्तराखण्ड माल्टा फ्रूट जैसे 11 कृषि उत्पादों का जीआई टैग लिये जाने का कार्य भी फाईल कर दिया गया है।

इस दौरान उद्योग मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि जिन उत्पादों को भौगोलिक संकेतांक प्रमाण.पत्र प्राप्त हुए है, अब उन उत्पादों की मार्केट में ब्राडिंग बढ़ने से अधिक डिमांड बढ़ेगी तथा उनको अच्छा मूल्य प्राप्त होगा। जिससे इन उत्पादों से जुड़े हुए उत्पादक सीधे.सीधे लाभान्वित होंगे। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड सरकार के निर्देशन पर अन्य उत्पादों का जीआई टैग किये जाने का भी कार्य जारी है।

इस कार्यक्रम के अवसर पर तकनीकी कार्यशाला का भी आयोजन किया गया जिसमें पदमश्री डॉ. रजनीकांत एवं उप रजिस्ट्रार, जीआई सचिन शर्मा द्वारा भौगोलिक संकेतांक से सम्बन्धित जानकारी प्रदान की गई।

इस मौके पर कार्यक्रम में संयुक्त सचिव, डीपीआईआईटी भारत सरकार श्रुति सिंह, संयुक्त सचिव, डीपीआईआईटी भारत सरकार राजेन्द्र रतनू, सचिव कृषि एवं उद्यान मीनाक्षी सुन्दरम, सचिव राधिका झा, महानिदेशक.आयुक्त उद्योग रोहित मीणा, निदेशक उद्योग सुधीर चन्द्र नौटियाल, निदेशक कृषि गौरीशंकर सहित उद्योग एवं कृषि विभाग के अधिकारीव कर्मचारी तथा प्रदेश से आए हुए जैविक किसान व काश्तकार सभागार में उपस्थित थे वहीं कई अन्य लोग विभिन्न जनपदों से वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

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