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Sunday, September 6, 2026
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गिड़गिड़ता रहा परिवार, अफसरों के सामने जिंदा जली मां-बेटी, लोगों में आक्रोश

देहरादून: ग्राम समाज की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की टीम के सामने मां-बेटी ने जिंदा जलकर जान दे दी I दोनों को बचाने के प्रयास में गृहस्वामी व रुरा इंस्पेक्टर भी झुलस गए।

कानपुर देहात के मैथा तहसील की मड़ौली पंचायत के चाहला गांव से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां ग्राम समाज की जमीन से कब्जा हटाने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक अफसरों के सामने ही झोपड़ी के अंदर मां-बेटी जिंदा जल गई।  

मां-बेटी की मौत से आक्रोशित लोगों ने हंगामा करते हुए लेखपाल पर कुल्हाड़ी से हमला कर घायल कर दिया। भीड़ का गुस्सा देख टीम के लोग अपने वाहनों मौके पर छोड़कर भाग गए। इसके बाद आक्रोशितों ने एसडीएम, रुरा इंस्पेक्टर, लेखपाल व तहसीलदार व गांव के 10 लोगों पर हत्या की रिपोर्ट दर्ज किए जाने की मांग करते हुए शवों को नहीं उठने दिया।

दरअसल, डीएम नेहा जैन सोमवार को अपने कार्यालय में जनसुवाई कर रही थीं। उसी दौरान डीएम कार्यालय पहुंचे मड़ौली गांव कुछ लोगों ने गांव के ही कृष्ण गोपाल दीक्षित उर्फ राघव की ग्राम समाज की भूमि पर कब्जा करने की शिकायत की। डीएम ने शिकायती पत्र पर एसडीएम को मौके पर जाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

एसडीएम मैथा ज्ञानेश्वर प्रसाद, लेखपाल अशोक के अलावा राजस्व और रुरा इंस्पेक्टर के साथ मौके पर पहुंचे। राजस्व विभाग की टीम बुलडोजर से ग्राम समाज की जमीन से कृष्ण गोपाल का कब्जा हटना शुरू किया। कृष्ण गोपाल और उसका परिवार अफसरों के सामने गिड़गिड़ता रहा, लेकिन किसी का दिल नहीं पसीजा। उसी दौरान अचानक वहां रखी कृष्ण गोपाल की झोपड़ी में आग लग गई। उस वक्त घर में मौजूद कृ्ष्ण गोपाल की पत्नी प्रमिला (54) और बेटी शिवा (22) लपटों के बीच फंस गईं। उन्हें बचाने के प्रयास में कृष्ण गोपाल व रुरा इंस्पेक्टर दिनेश गौतम झुलस गए।

मिलीभगत का लगाया आरोप

पत्नी और बेटी की मौत से दुखी कृष्ण गोपाल ने गांव में रहने वाले एक फौजी पर लेखपाल व एसओ से मिलीभगत कर कब्जा हटाने की कार्रवाई कराने का आरोप लगाया है। कृष्ण गोपाल का कहना है कि मामले की शिकायत व अपने और परिवार पर दर्ज एफआईआर को लेकर एसपी से बात करने गया था। एसपी बात सुनने की बजाय उसे मारने दौड़े और कहा भाग जाओ यहां से। डीएम से मिलने गया था, लेकिन उनसे मुलाकात नहीं हो पाई थी।

बेटे ने कई अफसरों के शामिल होने का लगाया आरोप

कृष्ण गोपाल के बेटे शिवम ने रोते हुए बताया कि एसडीएम, लेखपाल समेत कई अफसर, रुरा इंस्पेक्टर व गांव के कई लोग घटना में शामिल हैं। कहा कि वह भी घटना के वक्त मां व बहन के साथ झोपड़ी में सो रहा था। आग लगने पर वह भागकर आ गया। फिर मां व बहन को बचाने के लिए भीतर गया, लेकिन दोनों के शरीर का वजन ज्यादा था। इसलिए उन लोगों को उठाकर बाहर नहीं ला सका और दोनों की मौत हो गई। इस दौरान कब्जा हटाने आए लोग वहां से भाग गए। शिवम ने साजिश में डीएम समेत कई अफसरों के शामिल होने का भी आरोप लगाया है।

डीएम ने थाने में बैठकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली। एसपी बीबीजीटीएस मूर्ति के दलबल के साथ मौके पर पहुंचने के बाद डीएम भी गांव पहुंचीं हालांकि वह घटनास्थल पर नहीं गई। इसके बाद परिजनों से बिना किसी संवाद के डीएम लौट गईं। फिर मंडलायुक्त व आईजी के मौके पर पहुंचने पर डीएम वहां पहुंची और पीड़ित परिवार से बात की।

कब्जा हटाने पहुंचे अफसरों के सामने मां-बेटी की जिंदा जलने की घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई। कोई अप्रिय घटना न हो इसलिए रूरा, शिवली, डेरापुर, रसूलाबाद, अकबरपुर, मंगलपुर थानों की फोर्स, एसओजी, क्यूआईटी समेत भारी संख्या में पुलिस बल और पीएसी को गांव में तैनात किया गया है।

मां-बेटी की मौत के बाद मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की गहनता से जांच की। टीम ने घटनास्थल और आसपास से साक्ष्य जुटाए है। माना जा रहा है कि मंगलवार को भी फोरेंसिक एक्सपर्ट जांच के लिए मौके पर आ सकते हैं।

राज्यमंत्री और नेताओं ने दिया दिलासा

मां-बेटी की मौत की खबर पाकर राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला और पूर्व सांसद अनिल शुक्ला वारसी मौके पर पहुंचे। दोनों ने दुखी परिवार को सांत्वना दी। साथ ही घटना के बारे में जानकारी लेने के साथ ही हर संभव मदद का भरोसा दिया। राज्यमंत्री ने मामले की निष्पक्ष जांच व सरकारी मदद दिलाए जाने की बात भी पीड़ित परिवार से कही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ के आदेश पर राज्यमंत्री मौके पर पहुंची थी। इसके अलावा कई और नेता पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने पहुंचे थे।

मां-बेटी की मौत के बाद मौके पर पहुंची फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल की गहनता से जांच की। टीम ने घटनास्थल और आसपास से साक्ष्य जुटाए है। 

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