Latest news
23 अक्टूबर से उत्तराखण्ड में फिर मौसम के करवट लेने के आसार देहरादून में पहली बार नए और भव्य परिसर में होगा विरासत महोत्सव पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम धामी ने की कई घोषणाएं, 1600 पदों को जल्द भरने का ऐलान स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान के तह्त शहर में चला विशेष सफाई अभियान, 40 टन कूड़ा उठाया गया राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का होगा संपूर्ण कायाकल्प केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को होंगे बंद मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर किया हवन एवं कन्या पूजन सिमोग में दशहरा पर्व समारोह में शामिल हुए संस्कृति मंत्री महाराज पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गईंः सीएम मुख्यमंत्री बन्नू बिरादरी द्वारा परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित दशहरा महोत्सव में हुए शामिल

[t4b-ticker]

Thursday, October 22, 2026
Homeराष्ट्रीयचंद्रयान की सफलता के बाद अब आदित्य-एल1 हुआ लॉन्च

चंद्रयान की सफलता के बाद अब आदित्य-एल1 हुआ लॉन्च

-भारत ने की दुनियां में दुसरा इतिहास रचने की तैयारी

नई दिल्ली: भारत के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान कि सफल लैंडिंग के बाद अब आदित्य-एल1 लॉन्च किया हैI इसे सूर्य की वास्तविक स्थिति जानने को लेकर लांच किया गया हैI हालांकि यह सूर्य तक नहीं जायेगाI परन्तु यह ऐसे स्थान पर जायेगा जहां से सूर्य की स्थिति पर नज़र रख सकेI

संस्कृत और हिंदी में आदित्य का अर्थ सूर्य होता है। ये अंतरिक्ष यान शनिवार दो सितम्बर को श्रीहरिकोटा से भारतीय समयानुसार सुबह 11.50 बजे अंतरिक्ष में रवाना हुआ। जहां आदित्य एल1 को पहुंचना है उसकी दूरी पृथ्वी से 15 लाख किलोमीटर है। यह दूरी पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी की चार गुना है लेकिन सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी का बहुत मामूली, लगभग 1 प्रतिशत ही है। पृथ्वी से सूर्य की दूरी 15.1 करोड़ किलोमीटर है। अगर नासा के पार्कर अंतरिक्ष यान से तुलना करें जो कि एक हफ्ते पहले ही शुक्र से होकर गुजरा था, तो पार्कर सूर्य की सतह से 61 लाख किलोमीटर करीब होकर गुजरेगा।

हालांकि आदित्य एल1 को फिर भी अपने गंतव्य तक पहुंचने में समय लगेगा।इसरो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी है, “लॉन्च से लेकर एल1 (लैंगरैंज प्वाइंट) तक पहुंचने में आदित्य एल-1 को लगभग चार महीने लगेंगे। मिशन में जिस एल1 का नाम दिया जा रहा है वो लैगरेंज प्वाइंट है।

यह अंतरिक्ष में एक ऐसी जगह है जहां सूर्य और पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल संतुलित होता है। यहां एक किस्म का न्यूट्रल प्वाइंट विकसित हो जाता है जहां अंतरिक्ष यान के ईंधन की सबसे कम खपत होती है। इस जगह का नाम फ्रांसीसी गणितज्ञ जोसेफ लुईस लैगरेंज के नाम पर रखा गया है जिन्होंने इस बिंदु के बारे में 18वीं सदी में खोज की थी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments