Latest news
23 अक्टूबर से उत्तराखण्ड में फिर मौसम के करवट लेने के आसार देहरादून में पहली बार नए और भव्य परिसर में होगा विरासत महोत्सव पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम धामी ने की कई घोषणाएं, 1600 पदों को जल्द भरने का ऐलान स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान के तह्त शहर में चला विशेष सफाई अभियान, 40 टन कूड़ा उठाया गया राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का होगा संपूर्ण कायाकल्प केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को होंगे बंद मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर किया हवन एवं कन्या पूजन सिमोग में दशहरा पर्व समारोह में शामिल हुए संस्कृति मंत्री महाराज पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गईंः सीएम मुख्यमंत्री बन्नू बिरादरी द्वारा परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित दशहरा महोत्सव में हुए शामिल

[t4b-ticker]

Thursday, October 22, 2026
Homeउत्तराखण्डदो दिवसीय बौद्धिक संपदा (आईपी) यात्रा कार्यक्रम का देहरादून में हुआ समापन

दो दिवसीय बौद्धिक संपदा (आईपी) यात्रा कार्यक्रम का देहरादून में हुआ समापन

देहरादून। विकास आयुक्त, एमएसएमई कार्यालय, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा राष्ट्रीय स्तर की बौद्धिक संपदा (आईपी) यात्रा कार्यक्रम दूसरे दिन होटल मधुबन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम को एसआरएचयू के कुलपति डॉ. राजेंद्र डोभाल ने संबोधित किया, जहां उन्होंने विचारों की खोज करने और विचारों को एक उत्पाद में परिवर्तित करने और अंततः इसका व्यावसायीकरण करने और इसकी रक्षा करने के महत्व से अवगत कराया। उन्होंने आगे इस बात पर प्रकाश डाला कि समाज में वैज्ञानिक ज्ञान की कमी है और यही भारत में कम नवाचार और खोजों का कारण है। हमारे देश में क्लिनिकल परीक्षण शून्य से नीचे स्तर पर हैं और आईपीआर को बढ़ावा देने और विकास के लिए एक संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना समय की मांग है।
डॉ आशा कपूर, स्वतंत्र कृषि सलाहकार ने कृषि में आईपीआर की भूमिका पर प्रकाश डाला और कृषि में प्रजनक अधिकारों के महत्व को भी समझाया। उन्होंने आगे बताया कि उत्तराखंड राज्य ने हाल ही में जीआई टैग के तहत 18 उत्पादों को जोड़ा है। डॉल्फिन यूनिवर्सिटी के डीन डॉ. संजय अग्रवाल ने प्रतिभागियों को बताया कि एक अभिनव विचार व्यवसाय को आगे ले जा सकता है और विचारों को केवल तभी साझा किया जाना चाहिए जब इसे दूसरों द्वारा नकल किए जाने से बचाया जाए।
डॉ. राजीव कुरेले, एसोसिएट प्रोफेसर, आयुर्वेद फैकल्टी, उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय और विशेषज्ञ सदस्य, एएसयू ड्रग लाइसेंस पैनल, उत्तराखंड सरकार ने आयुष क्षेत्र में आईपीआर के महत्व और भूमिका और हर्बल क्षेत्र में उभरते उद्यमियों के लिए इस क्षेत्र में बड़े व्यावसायिक अवसर पर प्रकाश डाला। आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता हेमन्त कोचर, अध्यक्ष, उत्तराखंड चैप्टर, पीएचडीसीसीआई और डॉ एच पी कुमार, सलाहकार, पीएचडीसीसीआई ने की।कार्यक्रम में पीएचडीसीसीआई की निदेशक कंचन जुत्शी और पीएचडीसीसीआई के रेजिडेंट निदेशक विशाल काला उपस्थित थे। यूनाइटेड और यूनाइटेड के वसंत चंद्र और प्रेम वीर सिंह ने भी भारत में बौद्धिक संपदा अधिकारों के प्रवर्तन और आईपी उल्लंघन के परिणामों पर विचार-विमर्श किया। तकनीकी सत्र के बाद हेल्पडेस्क कैंप आयोजित किया गया, जहां आईपी विशेषज्ञों ने एमएसएमई और स्टार्ट-अप के प्रश्नों का समाधान किया और उनके प्रश्नों पर विस्तार से चर्चा की। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में एमएसएमई, स्टार्ट-अप और विभिन्न विश्वविद्यालयों के छात्रों ने भाग लिया।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments