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Wednesday, October 28, 2026
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वनों के संरक्षण व वन सम्पदाओं से राजस्व वृद्धि के लिए हों प्रभावी प्रयासः धामी

देहरादून। वनों के संरक्षण के साथ वन सम्पदाओं से राजस्व वृद्धि के लिए और प्रभावी प्रयास किये जाएं। वन विभाग के गेस्ट हाउस के आधुनिकीकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए। जड़ी-बूटियों, कृषिकरण तथा विपणन के क्षेत्र में कार्य के लिए और अधिक संभवनाएं तलाशी जाए। मानव वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए कारगर उपाय किये जाएं। वनाग्नि प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण एवं ईको -टूरिज्म पर विशेष ध्यान दिया जाए। ये निर्देश मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मंगलवार को सचिवालय में वन विभाग की गेम चेंजर योजनाओं की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को दिये।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन सम्पदाओं का बेहतर उपयोग के साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजागार को बढ़ावा दिया जाए। ग्रीष्मकाल के दृष्टिगत वनाग्नि की रोकथाम के लिए प्रभावी कार्ययोजना के साथ रणनीति बनाई जाए, ताकि वनाग्नि से होने वाले नुकसान से बचा जा सके। यह सुनिश्चित किया जाए कि ऐसे प्रयास केवल कागजों तक सीमित न रहे, धरातल पर दिखाई दें। मानव वन्यजीव संघर्ष की घटनाओं को रोकने के लिए अन्य राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिस का अध्ययन किया जाए और राज्य में इसके लिए बेहतर कार्य योजना बनाई जाए।
बैठक में जानकारी दी गई कि इको टूरिज्म के अंतर्गत इको कैंपिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास, पुराने फॉरेस्ट रेस्ट हाउस के रिस्टोर, स्थानीय युवाओं को विभिन्न गतिविधियों जैसे नेचर गाइड का प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इको टूरिज्म के लिए समर्पित एक वेबसाइट बनाई जाएगी। अभी तक विभिन्न क्षेत्रों में संचालित इको टूरिज्म क्षेत्र से स्थानीय युवाओं को लगभग रुपए 5 करोड़, जिप्सी संचालन से 17 करोड़ और स्वयं सहायता समूह को 30 लाख की आय सृजित हुई है।
ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान भी मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राज्य में ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने की दिशा में तेजी से कार्य किये जाएं। लघु जल विद्युत परियोजनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की मुख्य अवधारणा में ऊर्जा और पर्यटन प्रदेश था। पर्यटन के क्षेत्र में राज्य में तेजी से कार्य हो रहे हैं, लेकिन ऊर्जा के क्षेत्र में अनेक संभावनाओं पर कार्य करने की जरूरत है।
बैठक में वन मंत्री सुबोध उनियाल, अवस्थापना अनुश्रवण परिषद के उपाध्यक्ष विश्वास डाबर, मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, आर.मीनाक्षी सुंदरम, प्रमुख वन संरक्षक डॉ. धनंजय मोहन, अपर सचिवरंजना राजगुरू , उत्तराखण्ड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक संदीप सिंघल, यूपीसीएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार, पिटकुल के प्रबंध निदेशक पी.सी.ध्यानी और संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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