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Sunday, September 6, 2026
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मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान ने वन सेवा प्रशिक्षुओं के लिए आयोजित किया प्रशिक्षण कार्यक्रम

देहरादून। भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान, देहारादून द्वारा भारतीय वन सेवा के 115 प्रशिक्षुओं हेतु मृदा तथा जल संरक्षण एवं जलागम प्रबंधन विषय पर प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहारादून द्वारा प्रायोजित किए गये प्रशिक्षण की विषयवस्तु में मृदा अपरदन के भारतीय अर्थव्यवस्था व जलवायु परिवर्तन पर प्रभाव, जलागम क्षेत्रों की विशिष्ठ्ताएं, भू-उपयोग वर्गीकरण, जन सहभागिता, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, मृदा अपरदन नियंत्रण, मृदा एवं जल संरक्षण के अभियांत्रिक व वानस्पतिक उपाय, मृदा व जल संरक्षण संरचनाओ के प्रारूप  व लागत का आंकलन, मृदाहानि व अफवाह का मापन आदि विषयो को शामिल करते हुए व्याख्यान आयोजित किये गये। इसके अतिरिक्त  इस प्रशिक्षण में 115 प्रशिक्षुओं के कौशल विकास हेतु क्षेत्र प्रदर्शन  आयोजित कर मृदा व जल संरक्षण उपाय दिखाये गये। आयोजित किये गये प्रशिक्षण में प्रशिक्षुओं की जलागम प्रबंधन कार्याे के सफल नियोजन हेतु फील्ड में प्रयोगिक सत्रों का आयोजन भी किया गया। इन सत्रो में सहभागी ग्रामीण समीक्षा (पी॰ आर ए) प्रक्रिया का उपयोग करना भी सिखाया गया एवं प्रशिक्षुओं द्वारा विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन के नमूने भी तैयार करवाए गये।
आईएफएस प्रशिक्षुओं द्वारा अंततः विभिन्न जलागमों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट की दृश्य प्रस्तुति संकायों की विशेषज्ञ टीम डॉ. चरण सिंह, डॉ. बांके बिहारी, इंजीनियर एस.एस. श्रीमाली, डॉ. एम. मुरुगानंदम और डॉ. लेख चंद के समक्ष प्रस्तुत की, जिसका गहन मूल्यांकन करते हुए सुधार के सुझाव दिए गए। आयोजित प्रशिक्षण के मूल्याकन समस्त प्रतिभागी प्रशिक्षुओं द्वारा तैयार की गई विस्तृत परियोजना प्रतिवेदनो के प्रस्तुतीकरण के साथ साथ लिखित परीक्षा भी आयोजित की गई। संस्थान के निदेशक डॉ एम॰ मधु व मानव संसाधन विकास एवं सामाजिक विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ चरण सिंह के मार्गदर्शन एवं नेतृत्व में प्रशिक्षण का समन्वय डॉ० लेख चंद, प्रधान वैज्ञानिक, डॉ० मातबर सिंह राणा, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं सुरेश कुमार, मुख्य तकनीकी अधिकारी के द्वारा किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी से कुणाल अंगरीश पाठ्यक्रम निदेशक और प्रो. सरिता कुमारी पाठ्यक्रम समन्वयक थीं।

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