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Wednesday, October 28, 2026
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देहरादून में हिमालयन एग्रोइकोलॉजी पहल के तहत राज्य स्तरीय परामर्श का आयोजन

देहरादून। हिमालयी क्षेत्रों में टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने, जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन के अनुरूप खेती और किसानों की आजीविका सुदृढ़ करने के उद्देश्य से हिमालयन एग्रोइकोलॉजी इनिशिएटिव के तहत उत्तराखंड राज्य स्तरीय द्वितीय हितधारक परामर्श का आयोजन गुरुवार को देहरादून के जीएमएस रोड स्थित होटल सैफ्रन लीफ में किया गया। परामर्श में उत्तराखंड के लिए प्रस्तावित एग्रोइकोलॉजी रोडमैप और उससे जुड़ी नीति सिफारिशों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें सरकारी विभागों, शोध संस्थानों, किसान संगठनों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं उत्तराखंड किसान आयोग के उपाध्यक्ष चौधरी अजीत सिंह ने कहा कि एग्रोइकोलॉजी को किसानों की आय वृद्धि, खेती की लागत में कमी और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से सीधे जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संरक्षण के साथ उपयोग की नीति अपनाने से ही प्राकृतिक संसाधन दीर्घकाल तक समृद्ध बने रहेंगे। वहीं उत्तराखंड जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष एस.पी. सुबुधि ने कहा कि एग्रोइकोलॉजी रोडमैप में जैव विविधता संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय समुदायों की भूमिका को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाना आवश्यक है।
तकनीकी सत्र में डॉ. जे.सी. राणा, इंडियन कंट्री रिप्रेजेंटेटिव, एलायंस ऑफ बायोडायवर्सिटी इंटरनेशनलदृब्प्।ज् ने उत्तराखंड के लिए एग्रोइकोलॉजी रोडमैप और नीति सिफारिशों पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने कृषि जैव विविधता संरक्षण, पोषण-संवेदनशील खेती, जलवायु-लचीली कृषि प्रणालियां, संस्थागत समन्वय और एग्रोइकोलॉजी को नीति स्तर पर मुख्यधारा में लाने के लिए ठोस सुझाव रखे। उन्होंने कहा कि यह रोडमैप राज्य सरकार, शोध संस्थानों, किसान संगठनों और नागरिक समाज के संयुक्त प्रयासों से ही प्रभावी रूप से लागू हो सकता है।
कार्यक्रम का शुभारंभ डॉ. विनोद कुमार भट्ट कंसल्टेंट, उत्तराखंड) के स्वागत संबोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि हिमालयी राज्यों में पारंपरिक कृषि प्रणालियों, स्थानीय बीजों और जैव विविधता आधारित खेती का संरक्षण एग्रोइकोलॉजी की मूल भावना है। यह मॉडल उत्तराखंड में पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर सकता है। प्रस्तुति के बाद आयोजित समूह चर्चा सत्र में प्रतिभागियों ने रोडमैप पर अपने विचार, अनुभव और व्यावहारिक सुझाव साझा किए। चर्चा के दौरान नीति निर्माण, संस्थागत सहयोग और किसानों की भागीदारी को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। परामर्श में बीज बचाओ आंदोलन के विजय जड़धारी, अपर निदेशक पंकज नैथानी, सेवानिवृत्त वैज्ञानिक डॉ. वी.पी. उनियाल, डॉ. देवाशीष, पूर्व निदेशक उद्यान डॉ. बी.एस. नेगी, एच.एन. सेमवाल, प्रो. बी.पी. नौटियाल (भरसार विश्वविद्यालय), डॉ. वाई.पी. सिंह, डॉ. विनोद कोठारी (हिमुथान), विनिता शाह, डॉ. अरुण जुग्रान, डॉ. आर.के. सिंह, बलेंद्र जोशी सहित अनेक वैज्ञानिकों, नीति विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों और किसानों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। कार्यक्रम के समापन सत्र में सोनल डिसूजा, एसोसिएट मैनेजर (एशिया), एलायंस ऑफ बायोडायवर्सिटी इंटरनेशनलदृब्प्।ज् ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि इस परामर्श से प्राप्त सुझाव उत्तराखंड में एग्रोइकोलॉजी आधारित नीतियों और कार्यक्रमों को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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