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Friday, September 11, 2026
Homeउत्तराखण्डबाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, जिला प्रशासन ने तेज की निगरानी

बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, जिला प्रशासन ने तेज की निगरानी

देहरादून। जनपद देहरादून में बाल श्रम उन्मूलन को लेकर प्रशासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। जिला टास्क फोर्स की एक महत्वपूर्ण बैठक में पिछले एक साल की कार्रवाई की समीक्षा की गई, जिसमें चैंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच जिले में कुल 486 औचक निरीक्षण और छापेमारी की कार्रवाई की गई। इस सघन अभियान के दौरान विभिन्न प्रतिष्ठानों से 28 बाल श्रमिकों और 12 किशोर श्रमिकों सहित कुल 40 बच्चों को सुरक्षित रेस्क्यू कराया गया है।
सहायक श्रम आयुक्त शैलेस सती की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में बताया गया कि मुक्त कराए गए सभी 40 बच्चों को बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया गया है। प्रशासन इन बच्चों के पुनर्वास और शिक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है ताकि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ा जा सके।
दोषी नियोक्ताओं पर कसा शिकंजा, 20,000 की वसूली
मा0 उच्चतम न्यायालय के आदेशों का कड़ा अनुपालन करते हुए टास्क फोर्स ने दोषी नियोक्ताओं के खिलाफ आर्थिक और कानूनी कार्रवाई भी की है। रेस्क्यू किए गए मामलों में से चिन्हित नियोक्ताओं से 20-20 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति धनराशि वसूल की जा चुकी है। 12 मामलों में सुनवाई के दौरान आयु प्रमाण पत्र के आधार पर श्रमिक बाल श्रम की श्रेणी से बाहर पाए गए, जिसके चलते उन पर वसूली की कार्रवाई नहीं की गई। 05 मामलों में नए आदेश जारी किए गए हैं, जबकि 02 मामलों में जुर्माना वसूली के लिए जिला मजिस्ट्रेट को पत्र भेजा गया है। शेष 08 मामलों में कानूनी कार्रवाई अभी गतिमान है।
सहायक श्रम आयुक्त शैलेष सती ने स्पष्ट किया कि ‘बाल श्रम प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986’ के नए संशोधन के तहत 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को किसी भी खतरनाक या गैर-खतरनाक काम पर रखना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसका उल्लंघन करने वाले दोषियों को 6 महीने से लेकर 2 वर्ष तक की जेल और न्यूनतम 20 हजार रुपये के जुर्माने का कड़ा प्रावधान है।
संवेदनशील इलाकों में बढ़ेगी निगरानी
बैठक में सहायक श्रम आयुक्त ने पुलिस, श्रम विभाग और अन्य सभी संबंधित विभागों को आपस में बेहतर तालमेल बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले के संवेदनशील क्षेत्रों पर कड़ी निगरानी रखी जाए। चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 का प्रचार प्रसार के साथ सघन जागरूकता अभियान चलाया जाए ताकि लोग बाल श्रम के खिलाफ जागरूक हो सकें। इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट, रीजनल लेबर कमिश्नर दिनेश कुमार, सीएचएल समन्वयक साक्षी भंडारी, आसरा ट्रस्ट से अक्षित नौटियाल और जिला टास्क फोर्स व बाल कल्याण समिति के सदस्य मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

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