केदारनाथ। केरल के कालडी से शुरू हुई ‘मानस भारत स्वस्तिक यात्रा-1’ का पहला चरण 23 अक्टूबर को केदारनाथ धाम में संपन्न हो गया। 14 दिनों तक चली इस आध्यात्मिक यात्रा के समापन अवसर पर रामकथावाचक मोरारी बापू ने आदि शंकराचार्य के योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत को आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ने का एक विनम्र प्रयास है। उन्होंने यात्रा के सफल समापन का श्रेय भगवान केदारेश्वर की कृपा को दिया। केदारनाथ धाम में यात्रा के विराम दिवस पर मोरारी बापू ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने देश के विभिन्न क्षेत्रों को आध्यात्मिक सूत्र में पिरोने का अलौकिक कार्य किया था। यमुनोत्री, गंगोत्री (गोमुख), बदरीनाथ और केदारनाथ जैसे तीर्थस्थलों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की तीर्थ परंपरा देश की आध्यात्मिक एकता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।
मोरारी बापू ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में व्यासपीठ की यात्रा के दौरान कई बार ऐसी अनुभूति होती है, मानो कोई अदृश्य चेतना व्यवस्थाओं को सहज बनाने में सहायता कर रही हो। इसी आध्यात्मिक विश्वास के सहारे यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही। उन्होंने स्वस्तिक को ओम का साकार पर्याय बताते हुए कहा कि इस यात्रा का उद्देश्य भारत ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व को आध्यात्मिक दृष्टि से जोड़ने का प्रयास करना है। उन्होंने यात्रा से प्राप्त होने वाले चार प्रमुख संदेशोंकृभिक्षा, भजन, समाधि और सामवेदकृका उल्लेख किया। साथ ही रामकथा के विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से सत्य, प्रेम और करुणा का संदेश दिया। बापू ने यात्रा से प्राप्त आध्यात्मिक उपलब्धियों को आदि शंकराचार्य के चरणों में समर्पित किया। ‘मानस भारत स्वस्तिक यात्रा’ का दूसरा चरण 14 नवंबर से द्वारका में शुरू होगा। यह यात्रा 22 नवंबर को जगन्नाथ पुरी में विराम लेगी। आयोजकों के अनुसार, यात्रा का सीधा प्रसारण आस्था टीवी और चित्रकूटधाम तलगाजरडा के यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा। पहले दिन प्रसारण शाम चार बजे से शुरू होगा, जबकि अन्य दिनों में यात्रा की गतिविधियों और अनुकूल समय के अनुसार कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाएगा।

