Latest news
देहरादून में अवैध निर्माणों के खिलाफ एमडीडीए का सख्त रुख गढ़ी कैंट में आयोजित “हिमालय की गूँज” मिलिट्री बैंड सिम्फनी में राज्यपाल ने किया प्रतिभाग उत्तराखण्ड ग्रामीण बैंक की कॉफी टेबल बुक का राज्यपाल ने किया विमोचन उत्तराखंड पुलिस के नवनियुक्त आरक्षियों को केंद्रीय गृह मंत्री ने प्रदान किए नियुक्ति पत्र यूजीसी के प्रस्तावित काले कानून को वापस लेने की मांग को लेकर ब्राह्मण समाज महासंघ ने दिया ज्ञापन केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने किया 1129.91 करोड़ रुपए की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास नूतन न्याय संहिता पर राज्य स्तरीय प्रदर्शनी का शुभारंभ केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह बोले, केदारनाथ से कन्याकुमारी तक बाहर होंगे घुसपैठिया चारधाम यात्रा के लिए सरकार पूरी तरह से तैयारः महाराज आयुष्मान के बेहतरी को प्रयासों में गंभीरता जरूरीः डा धन सिंह रावत

[t4b-ticker]

Sunday, March 8, 2026
Homeराष्ट्रीय‘रामसेतु’ को लेकर कोर्ट में फिर उठी मांग , कोर्ट ने केंद्र...

‘रामसेतु’ को लेकर कोर्ट में फिर उठी मांग , कोर्ट ने केंद्र से मांगी राय

देहरादून: सुप्रीम कोर्ट में रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक घोषित करने की मांग को लेकर एक याचिका दायर की गई है। याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने केंद्र सरकार से उसकी राय मांगी है। 

सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर याचिका पर केंद्र से जवाब मांगते हुए अगली सुनवाई की तारीख 9 मार्च तय की है।  बता दें कि सुब्रमण्यम स्वामी ने इससे पूर्व 2018 में यह याचिका सुप्रीम कोर्ट में दी थी। जिसके बाद उन्होंने साल 2020 में रामसेतु को ऐतिहासिक स्मारक के रूप में मान्यता देने की याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की थी। उस समय कोर्ट ने बाद में विचार करने की बात कही थी। सुप्रीम कोर्ट ने उस समय भी केंद्र सरकार को इस मामले पर एक हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था।

रामायण का समय पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों के बीच एक बहस का विषय है। चूना पत्थर के शोलों की 48 किलोमीटर की श्रृंखला को रामायण के साथ जोड़ दिया गया है। हिंदू धर्म ग्रंथ ‘रामायण’ में कहा गया है कि “वानर सेना” ने राम को लंका पार कराने और सीता को बचाने में मदद करने के लिए समुद्र पर एक पुल बनाया था। व कुछ लोगो का कहना है कि यह इस दावे पर टिका है कि यह मानव निर्मित है। 2007 में एएसआई ने कहा था कि उसे इसका कोई सबूत नहीं मिला है। बाद में इसने सर्वोच्च न्यायालय में यह हलफनामा वापस ले लिया। राम सेतु और उसके आसपास के क्षेत्र की प्रकृति और गठन को समझने के लिए पानी के नीचे पुरातात्विक अध्ययन करने का प्रस्ताव है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments