Latest news
श्रमिकों के हितों की सुरक्षा करना उनकी सरकार की प्राथमिकताः सीएम धामी बेकाबू बस अनियंत्रित होकर क्लीनिक में घुसी, कई यात्री घायल कुट्टू के आटे की बिक्री पर धामी सरकार की सख्ती, बिना लाइसेंस नहीं बिकेगा कुट्टू का आटा, सील पैक में ... निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ कार्यवाही को मुख्य शिक्षाधिकारी को सौंपा ज्ञापन उत्तराखण्ड जलापूर्ति कार्यक्रम से सम्बन्धित 12वीं उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की वर्चुअल बैठक आयोजित देहरादून-नैनीताल में विभिन्न विकास कार्यों के लिए 164.67 करोड़ मंजूर फिट उत्तराखण्ड अभियान के लिए 15 दिन के अन्दर पूरा एक्शन प्लान बनाया जायः सीएम मुख्यमंत्री धामी ने 20 महानुभावों को सौंपे दायित्व कुट्टू आटे खाने से लोग हो रहे बीमार, सतर्क रहें

[t4b-ticker]

Thursday, April 3, 2025
Homeउत्तराखण्डराज्यपाल ने दी महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण विधेयक की मंजूरी

राज्यपाल ने दी महिलाओं को 30 फीसदी आरक्षण विधेयक की मंजूरी

देहरादून: महिलाओं के आरक्षण विधेयक को लेकर राज्यपाल की मंजूरी मिल गई है राजभवन को 14 विधेयक मंजूरी के लिए भेजे गए थे इनमें से महिला आरक्षण समेत 12 को मंजूरी मिल गई है। साथ ही महिला अभ्यर्थियों को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का कानूनी अधिकार भी मिल गया है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पिछले दिनों महिला क्षैतिज आरक्षण कानून के जल्द लागू होने के संकेत दिए थे। राजभवन के सूत्रों के मुताबिक राज्यपाल की मंजूरी के साथ विधेयक विधायी विभाग को भेज दिया गया है।  

राज्य सरकार ने विधानसभा में बिल को सर्वसम्मति पारित कराकर राजभवन भेजा था। विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सदन में पारित 14  बिलों, जिनमें अधिकतर संशोधित विधेयक थे, के साथ महिला आरक्षण बिल को भी राज्यपाल की मंजूरी  मिलनी थी।
राज्य सरकार की नौकरियों में उत्तराखंड की महिलाओं को 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण के लिए कांग्रेस की नारायण दत्त तिवारी सरकार ने 24 जुलाई 2006 को आदेश जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इस पर हाईकोर्ट ने  आदेश पर रोक लगा दी थी। याचिकाकर्ताओं के वकील की ओर से कहा गया था राज्य सरकार के पास राज्य के निवास स्थान पर आधारित आरक्षण प्रदान करने की शक्ति नहीं है। भारत का संविधान केवल संसद को अधिवास के आधार पर आरक्षण देने की अनुमति देता है। राज्य सरकार का वर्ष 2006 का आदेश संविधान के अनुच्छेद 14, 16, 19 और 21 का उल्लंघन है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments