Latest news
चारधाम यात्रा के लिए सरकार पूरी तरह से तैयारः महाराज आयुष्मान के बेहतरी को प्रयासों में गंभीरता जरूरीः डा धन सिंह रावत गृहमंत्री के दौरे से पहले देहरादून प्रशासन अलर्ट, डीएम ने एसएसपी संग व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण सारा की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित हाई पावर कमेटी ने 187.11 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को दी मंजूरी महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई देहरादून में नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन अंतिम चरण में, जल्द होगा जनता को समर्पित टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्रः सीएम 17 लाख से अधिक लाभार्थियों ने उठाया आयुष्मान योजना का लाभः डॉ. धन सिंह डीएम देहरादून सविन बंसल ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर राशन आपूर्तिकर्ता सेंट्रल गोदाम रुड़की में क...

[t4b-ticker]

Saturday, March 7, 2026
Homeउत्तराखण्डसभी चुनौतियों को दूर कर पांचों सालों में सबसे आधुनिक बनेगी देश...

सभी चुनौतियों को दूर कर पांचों सालों में सबसे आधुनिक बनेगी देश की न्याय व्यवस्थाः अमित शाह

देहरादून। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के 5वें अंतर्राष्ट्रीय और 44वें अखिल भारतीय अपराध विज्ञान सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि, ‘टेक्नोलॉजी की मदद से क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की सभी चुनौतियों को दूर कर 5 सालों में देश की न्याय व्यवस्था दुनिया भर में सबसे आधुनिक बनेगी।
यह भी एक संयोग है कि नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी के 5वें अंतर्राष्ट्रीय और 44वें अखिल भारतीय अपराध विज्ञान सम्मेलन का उद्घाटन ऐसे समय में हो रहा है जब भारत की आपराधिक न्याय प्रणाली एक नए युग में प्रवेश कर रही है। दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानून में आमूल-चूल परिवर्तन करते हुए नए भारत में नए कानून का प्रस्ताव रखा था। पहले के कानून का उद्देश्य अंग्रेजों के राज को सुरक्षित करना और भारतीयों को दंड देना था, अब न्याय की मूल भावना से कानून को लाया गया है। यह भी गौर करने वाली बात है कि पहले के कानून में ‘दंड’ शब्द जुड़ा हुआ था, जबकि नए कानून में ‘न्याय’ शब्द जुड़ा हुआ है। नए कानून में 7 साल और उससे बड़ी सजा के लिए हर क्राइम सीन पर फॉरेंसिक साइंस ऑफिसर का विजिट अनिवार्य करने वाले शाह का मानना है कि इससे जाँच आसान हो जाएगी और जजों का काम भी आसान हो जाएगा।
गुलामी की मानसिकता को खत्म कर न्याय की मंशा से कानून बनाने वाले भारतीय राजनीति के चाणक्य शाह ने ऐसी व्यवस्था बनाई है कि आने वाले 5 साल बाद देश में हर वर्ष 9,000 से अधिक फॉरेंसिक साइंस ऑफिसर्स तैयार होंगे। अमृतकाल में तीन नए कानून से इज ऑफ पुलिसिंग और इज ऑफ जस्टिस का दौर शुरू होने वाला है। आने वाले 1 साल में देशभर में  नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी  के 9 और कैंपस खुलेंगे जो क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम में फॉरेंसिक साइंस के उपयोग के रिसोर्सेज तैयार करने में अहम भूमिका निभाएंगे। नए कानूनों में इन्वेस्टिगेशन, प्रॉसीक्यूशन और न्यायिक प्रक्रिया में फॉरेंसिक साइंस को महत्व दिया गया है, इससे युवाओं के लिए बहुत बड़ा क्षेत्र खुलने जा रहा है। देश की जनता ने देखा है कि आजादी के बाद कोई सरकार 50 सालों में चार से पाँच युग परिवर्तनकारी काम करती है, लेकिन मोदी सरकार ने 10 साल में 50 से ज्यादा युग परिवर्तनकारी काम कर दिया है। न्याय के लिए प्रतिबद्ध शाह जहाँ यह मानते हैं कि फॉरेंसिक साइंस का उपयोग ना केवल इन्वेस्टीगेशन बल्कि न्याय दिलाने की प्रक्रिया में भी हो, वहीं यह भी मानते हैं कि क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम को अपराधियों से 2 जनरेशन आगे रहने की जरूरत है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments