Latest news
चारधाम यात्रा के लिए सरकार पूरी तरह से तैयारः महाराज आयुष्मान के बेहतरी को प्रयासों में गंभीरता जरूरीः डा धन सिंह रावत गृहमंत्री के दौरे से पहले देहरादून प्रशासन अलर्ट, डीएम ने एसएसपी संग व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण सारा की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित हाई पावर कमेटी ने 187.11 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को दी मंजूरी महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई देहरादून में नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन अंतिम चरण में, जल्द होगा जनता को समर्पित टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्रः सीएम 17 लाख से अधिक लाभार्थियों ने उठाया आयुष्मान योजना का लाभः डॉ. धन सिंह डीएम देहरादून सविन बंसल ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर राशन आपूर्तिकर्ता सेंट्रल गोदाम रुड़की में क...

[t4b-ticker]

Saturday, March 7, 2026
Homeउत्तराखण्डउत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी गठित

उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति के लिए सर्च कमेटी गठित

नैनीताल। उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति न करने के खिलाफ दायर याचिका पर नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से मुख्य सचिव ने पूर्व के आदेश का अनुपालन करते हुए शपथ पत्र पेश किया। जिसमें कहा गया कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में लोकायुक्त की नियुक्ति करने के लिए राज्य सरकार ने सर्च कमेटी गठित कर ली है। जिसकी एक बैठक 22 फरवरी 2025 को हो चुकी है।
मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि लोकायुक्त नियुक्त करने के लिए राज्य सरकार लोकायुक्त एक्ट के प्रावधानों का पूरी तरह से पालन कर रही है। जिस पर मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र और न्यायमूर्ति आशीष नैथानी की खंडपीठ ने सरकार से अगली तिथि तक स्थिति से अवगत कराने को कहा है। खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए चार हफ्ते बाद की तिथि नियत की है।
संस्थान के नाम पर सालाना खर्च हो रहा 2 से 3 करोड़ रुपएरू दरअसल, हल्द्वानी के गौलापार निवासी रवि शंकर जोशी ने नैनीताल हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की है। उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार ने अभी तक लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है। जबकि, लोक आयुक्त संस्थान के नाम पर सालाना 2 से 3 करोड़ रुपए खर्च हो रहा है। जनहित याचिका में कहा गया है कि कर्नाटक और मध्य प्रदेश में लोकायुक्त की ओर से भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है, लेकिन उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के हर एक छोटे से छोटे मामले को हाईकोर्ट में लाना पड़ रहा है। इसके अलावा याचिका में ये भी कहा गया है कि वर्तमान में राज्य की सभी जांच एजेंसी सरकार के अधीन हैं, जिनका पूरा नियंत्रण राज्य के राजनीतिक नेतृत्व के हाथों में है। वर्तमान में उत्तराखंड में कोई भी ऐसी स्वतंत्र जांच एजेंसी नहीं है, जिसके पास ये अधिकार हो कि वो बिना शासन की पूर्व अनुमति और दबाव के किसी भी राजपत्रित अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मुकदमा पंजीकृत कर सकें। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के नाम पर प्रचारित किया जाने वाला विजिलेंस विभाग भी राज्य पुलिस का ही हिस्सा है, जिसका पूरा नियंत्रण पुलिस मुख्यालय, सतर्कता विभाग या मुख्यमंत्री कार्यालय के पास ही रहता है। पूर्व में कोर्ट ने लोकायुक्त नियुक्त करने के लिए सरकार को निर्देश दिए थे, लेकिन अभी तक उस आदेश का न तो अनुपालन हुआ, न ही लोकायुक्त की नियुक्ति हुई। वहीं, अब पूरे मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments