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Thursday, October 22, 2026
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धामी सरकार की उपलब्धियों में जुड़ा एक और अध्याय

देहरादून। उत्तराखंड ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए वित्तीय वर्ष 2022-23 में 5,310 करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व हासिल किया है। यह उपलब्धि कैग यानी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया रिपोर्ट में दर्ज हुई है। कभी वित्तीय अनुशासन की चुनौतियों से जूझने वाला उत्तराखंड अब उन चुनिंदा राज्यों में शामिल हो गया है, जिन्होंने राजस्व अधिशेष का परचम लहराया है। राज्य सरकार भी इस उपलब्धि पर बेहद खुश नजर आ रही है।
कैग की यह रिपोर्ट उत्तराखंड के लिए सुखद मानी जा रही है। जो उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति में सुधार को दर्शा रही है। जो यह बताती है कि राज्य की आय में भी इजाफा हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस उपलब्धि को उत्तराखंड की जनता और सरकार के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया है। उनका कहना है कि यह केवल आंकड़ों की सफलता नहीं है। बल्कि, राज्य के समृद्ध और आत्मनिर्भर भविष्य की ओर बढ़ने का ठोस कदम है।
राजस्व अधिशेष का मतलब है कि किसी राज्य की आय उसके खर्च से ज्यादा हो। आमतौर पर राज्यों की आय कर व गैर-कर राजस्व और केंद्र से मिलने वाली सहायता राशि से मिलकर बनती है। जबकि, खर्च में प्रशासनिक व्यय वेतन, पेंशन, योजनाओं पर खर्च और अन्य जिम्मेदारियां आती हैं। यदि खर्च से ज्यादा आय दर्ज होती है तो इसे राजस्व अधिशेष कहा जाता है। यह किसी भी राज्य की मजबूत आर्थिक स्थिति और अनुशासित वित्तीय प्रबंधन का प्रतीक होता है।
कैग रिपोर्ट के मुख्य बिंदु के रूप में उत्तराखंड ने वित्तीय वर्ष 2022-23 में 5,310 करोड़ रुपये का राजस्व अधिशेष दर्ज किया है। जो बड़ी उपलब्धि है। राज्य की आय और व्यय के बीच संतुलन स्थापित करते हुए सकारात्मक अंतर पैदा किया गया। जिससे वित्तीय मजबूती आई। राजस्व वसूली में पारदर्शिता और खर्च पर नियंत्रण से वित्तीय अनुशासन कायम हुआ। जो प्रशासनिक सुधार की वजह से संभव हुआ। श्रेणी से जोड़कर देखे जाने वाले राज्यों में शामिल उत्तराखंड ने अपने प्रदर्शन से एक नई पहचान बनाई। जो आर्थिक परिवर्तन को दर्शाता है।
उत्तराखंड जैसे छोटे और पहाड़ी राज्य के लिए यह उपलब्धि बेहद खास है। पहली बार इतने बड़े पैमाने पर अधिशेष दर्ज किया गया है। 5,310 करोड़ रुपए का राजस्व अधिशेष राज्य की स्थापना के बाद एक रिकॉर्ड है। पारदर्शी नीतियों का भी असर है। इसके तहत सरकार ने कर संग्रहण यानी टैक्स कलेक्शन को पारदर्शी बनाने और अनावश्यक खर्च पर अंकुश लगाने की दिशा में काम किया। राज्य ने वित्तीय आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ाया है। अब उत्तराखंड केवल केंद्रीय सहायता पर निर्भर नहीं है। बल्कि, अपनी आय से भी मजबूती हासिल कर रहा है। माना जा रहा है कि इससे निवेश के लिए अनुकूल वातावरण मिलेगा। अधिशेष की स्थिति निवेशकों का भरोसा बढ़ाती है, जिससे औद्योगिक विकास की राह आसान होगी।

कुशल प्रबंधन ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम कियाः धामी
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प से प्रेरणा लेकर की गई नीतियों का परिणाम है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने बीते सालों में कई ठोस कदम उठाए हैं। जिसका सीधा असर आर्थिक सुधार के रूप में सामने आया है। उन्होंने कहा कि नकल विरोधी कानून लाकर पारदर्शी भर्ती और नौजवानों के भविष्य की रक्षा की है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हमारी सरकार के वित्तीय अनुशासन और संसाधनों के कुशल प्रबंधन ने राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने का काम किया है। राजस्व अधिशेष की स्थिति प्रदेश की बड़ी उपलब्धि है, जो आत्मनिर्भर और सशक्त उत्तराखंड की दिशा में उठाए जा रहे सतत प्रयासों का परिणाम है। करों और अन्य स्रोतों से आय में लगातार वृद्धि और फिजूलखर्ची पर नियंत्रण से राज्य की वित्तीय स्थिति मजबूत हुई है। यह उपलब्धि हमारे उस संकल्प को और ऊर्जा देती है, जिसके तहत उत्तराखंड को समृद्ध और प्रगतिशील बनाने की दिशा में लगातार कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
इसके अलावा सामाजिक सुधारों की दिशा में ऐतिहासिक पहल करते हुए समान नागरिक संहिता लाई है। महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम करते हुए महिला समूहों के माध्यम से रोजगार उपलब्ध कराना है। पर्यटन और उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसके चलते धार्मिक पर्यटन और औद्योगिक निवेश से राज्य की आय में वृद्धि हुई है। खर्च पर नियंत्रण और आय के स्रोत बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। उत्तराखंड राज्य का गठन साल 2000 में हुआ था। शुरुआती सालों में राज्य को केंद्र की वित्तीय सहायता पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ता था। पहाड़ी राज्य होने के कारण बुनियादी ढांचे और संसाधनों की कमी भी बड़ी चुनौती थी। कई बार उत्तराखंड को श्रेणी के राज्यों में गिना गया। जहां आर्थिक विकास और वित्तीय प्रबंधन कमजोर माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ सालों में राज्य ने न केवल इस छवि को बदला। बल्कि, वित्तीय प्रबंधन का उदाहरण भी पेश किया।

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