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Thursday, October 22, 2026
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सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने में सहायक होगा यह कार्यक्रम

देहरादून। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में उत्तराखण्ड ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रदेश सरकार ने नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफरी कार्यक्रम को स्वीकृति दे दी है। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने कहा कि सरकार का यह निर्णय मातृ एवं नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने तथा सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने की दिशा में एक मील का पत्थर सिद्ध होगा।
सोमवार को सचिवालय में राज्य स्तरीय मिडवाइफरी टास्क फोर्स की बैठक आयोजित की गयी। स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफरी कार्यक्रम को उत्तराखण्ड में प्रारम्भ करने की स्वीकृति प्रदान की गई। गौरतलब है कि वर्तमान में उत्तराखण्ड का मातृ मृत्यु अनुपात 104 प्रति एक लाख जीवित जन्म है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह 88 प्रति एक लाख जीवित जन्म है।
स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार के अनुसार नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफरी कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखण्ड के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफरी कार्यक्रम से राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार होगा और इससे उत्तराखण्ड के मृत्यु दर (एमएमआर) में कमी आएगी।
30 नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफ का होगा पहला बैचः स्वास्थ्य सचिव डॉ. आर राजेश कुमार ने बताया कि जल्द ही 30 नर्स प्रैक्टिशनर मिडवाइफ के पहले बैच की शुरुआत की जाएगी। इसके लिए एक विस्तृत प्रस्ताव शीघ्र ही तैयार किया जाएगा। यह 18 माह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम राज्य मिडवाइफरी प्रशिक्षण संस्थान, देहरादून में संचालित होगा। प्रशिक्षण पूर्ण करने के बाद, जीएनएम/बी.एससी. नर्सिंग पृष्ठभूमि वाली प्रशिक्षित मिडवाइफ को राज्य के चयनित सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में तैनात किया जाएगा। ये प्रशिक्षित मिडवाइफ संस्थानों में गुणवत्तापूर्ण, सम्मानजनक एवं साक्ष्य-आधारित मातृत्व सेवाएं प्रदान करेंगी, जिससे प्रसव सुरक्षित होंगे तथा माताओं एवं नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य बेहतर होगा। यह पहल भारत सरकार की मिडवाइफरी पहल एवं सतत् विकास लक्ष्यों के अनुरूप है और उत्तराखण्ड को मातृ स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में सहायक सिद्ध होगी। बैठक में मिशन निदेशक मनुज गोयल, निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डा. रश्मि पंत, डॉ. शिखा जंगपांगी, निदेशक स्वास्थ्य महानिदेशालय, डा. सीपी त्रिपाठी, निदेशक, स्वास्थ्य महानिदेशालय, डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक एनएचएम, वरिष्ठ परामर्शदाता, एनएचएम डॉ. नितिन अरोरा आदि विभाग के प्रमुख अधिकारी, कर्मचारी मौजूद थे।

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