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Monday, June 8, 2026
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निवेश के बहाने मोटा लाभ कमाने का लालच देकर लाखों की साइबर ठगी

देहरादून। एसटीएफ ने लाखों की साइबर ठगी का खुलासा किया है। एसटीएफ ने मामले में दो साइबर ठगों को नोएडा से गिरफ्तार किया। देहरादून निवासी व्यक्ति को मोटी कमाई का लालच देकर 65 लाख रुपए से अधिक की साइबर धोखाधड़ी की गई थी। साइबर धोखाधड़ी के लिए फर्जी नाम की कंपनी बनाकर, फर्जी बैंक खाते और कंपनी के नंबरों का प्रयोग किया जा रहा था। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों का विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों से सम्पर्क मिला है। आरोपियों के देश भर के अलग-अलग बैंकों में 18 से 20 करंट खाते खोले थे।
गौर हो कि कुछ समय पहले साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में रुड़की हरिद्वार निवासी एक पीड़ित ने इन्वेस्टमेंट से सम्बन्धित जानकारी के लिए गूगल पर सर्च किया तो गूगल पर फेसबुक का एक पेज ओपन हो गया था। जिस पर एक न्यूज चौनल पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन का एक वीडियो चल रहा था। जिसमें 21 हजार रुपए इन्वेस्ट करने पर सात दिनों साढ़े छह लाख देने का प्रलोभन दिया गया था। इस पर विश्वास करके पीड़ित ने फेसबुक पर दिए गए लिंक के माध्यम से रजिस्ट्रेशन किया। जिसके बाद साइबर अपराधियों ने पीड़ित को फोन कर विश्वास में लेकर निवेश कराकर मोटी कमाई का लालच दिया।
7 मई 2025 से 29 मई तक अलग-अलग बैंक खातों में रुपये जमा कराकर कुल 66 लाख 21 हजार रुपए की धोखाधड़ी की गई। इस शिकायत के आधार पर देहरादून साइबर क्राइम पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। साइबर क्राइम पुलिस ने घटना में प्रयोग मोबाइल नंबरों, बैंक खातों, व्हाट्सएप, मैसेंजर चौट्स और संबंधित डिजिटल माध्यमों की जानकारी के लिए बैंकों, टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर, डोमेन होस्टिंग कंपनियों और मेटा कंपनी से पत्राचार कर डेटा लिया। जिसके बाद पुलिस टीम धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड 2 शातिर आरोपी नितिन गौर और निक्कू बाबू को नोएडा से गिरफ्तार किया है।
एसएसपी एसटीएफ नवनीत भुल्लर ने बताया है कि आरोपी साइबर धोखाधड़ी के लिए फर्जी नाम की कंपनी बनाकर लोगों का नंबर हासिल करते थे। साइबर अपराधों में वीपीएम, प्रोक्सी सर्वर, टोर बराउसर ओर पब्लिक वाईफाई का उपयोग कर अपनी पहचान और लोकेशन छिपाई जाती थी। साथ ही अपने खुद के बैंक खातों और आधार कार्ड में भी अन्य व्यक्तियों की आईडी से प्राप्त ैडै ।समतज नंबरों का उपयोग कर रहे थे। गिरफ्तार आरोपियों का विदेशों में बैठे साइबर अपराधियों के सम्पर्क में होना पाया गया है। देश भर के अलग-अलग बैंकों में 18 से 20 करंट बैंक खातों का होना सामने आया है।

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