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Friday, July 10, 2026
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पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण योजनाओं के लिए एनएचएआई ने 6.04 करोड़ से अधिक जमा किएः सौरभ सिंह

देहरादून। भानियावाला, जॉलीग्रांट, ऋषिकेश फोर, सिक्स लेन परियोजना को लेकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण संबंधी भ्रामक दावों पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने स्पष्टिकरण देते हुए कहा कि यह परियोजना केवल आधुनिक एवं सुरक्षित सड़क अवसंरचना के निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि योजना के क्रियान्वयन में पर्यावरण संरक्षण, वन क्षेत्र के संरक्षण तथा वन्यजीवों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई ने कहा कि भानियावाला जॉलीग्रांट ऋषिकेश फोर सिक्स लेन परियोजना की इंजीनियरिंग डिजाइन तैयार करते समय सड़क क्षमता में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरणीय प्रभाव को न्यूनतम रखना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में रहा है। परियोजना के वन क्षेत्र वाले हिस्से में राइट ऑफ वे को यथासंभव कम रखा गया है।
उन्होंने कहा कि परियोजना के निर्माण के दौरान अतिरिक्त वन भूमि के उपयोग को न्यूनतम रखने के उद्देश्य से संपूर्ण कार्य मौजूदा राइट ऑफ वे के भीतर किया जा रहा है। पर्यावरणीय प्रभाव कम करने के लिए परियोजना के वन क्षेत्र में आरओडब्लू को 60 मीटर से घटाकर मात्र 23 मीटर किया गया है, जिससे अनावश्यक वन क्षेत्र प्रभावित होने से बचाया जा सके। एनएचएआई ने प्रतिपूरक वनीकरण तथा उसके अगले 10 वर्षों के रखरखाव के लिए 1.97 करोड़ से अधिक की राशि जमा की है। इसके अतिरिक्त, प्रतिपूरक वनीकरण एवं राज्य में हरित क्षेत्र बढ़ाने के उद्देश्य से 40 हेक्टेयर गैर-वन भूमि राज्य सरकार द्वारा वन विभाग को हस्तांतरित की गई है, जिससे भविष्य में व्यापक स्तर पर नए वन विकसित किए जा सकें। परियोजना में हाथियों एवं अन्य बड़े वन्यजीवों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए 01 प्रमुख ब्रिज-कम-एलीफेंट अंडरपास तथा 04 समर्पित एलीफेंट अंडरपास (लगभग 3.5 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड संरचना) का निर्माण किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त बाघ, तेंदुआ, सियार, जंगल बिल्ली, साही, जंगली सूअर, सांभर एवं चीतल जैसे वन्यजीवों के सुरक्षित आवागमन के लिए 5×3 मीटर आकार के 06 बॉक्स कल्वर्ट तथा सरीसृप, उभयचर एवं अन्य छोटे वन्यजीवों के लिए 1200 मिमी व्यास के 13 पाइप कल्वर्ट विकसित किए जा रहे हैं।
वन्यजीवों की सुरक्षा को और सुदृढ़ बनाने के लिए परियोजना में ग्रीन गाइड हेज, साउंड बैरियर, एंटी-ग्लेयर स्क्रीन, वन्यजीव चेतावनी संकेतक, स्पीड कैल्मिंग उपाय तथा श्नो हॉर्नश् जोन जैसी व्यवस्थाएँ भी शामिल की गई हैं। इन सभी उपायों का उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना, सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवागमन को सुरक्षित बनाए रखना है। परियोजना से प्रभावित 4,369 वृक्षों में से 754 वृक्षों को फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक आकलन के आधार पर प्रत्यारोपित किया जाएगा, जबकि शेष वृक्षों का नियमानुसार प्रबंधन किया जाएगा। छभ्।प् का प्रयास है कि जहाँ भी संभव हो, परिपक्व वृक्षों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर हरित आवरण को संरक्षित रखा जाए।
सौरभ सिंह, परियोजना निदेशक, पीआईयू देहरादून, एनएचएआई ने आगे बताया कि कुछ समाचार लेखों एवं सोशल मीडिया पोस्ट्स में यह दावा किया जा रहा है कि छभ्।प् एवं वन विभाग माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के विरुद्ध वृक्षों की कटाई कर रहे हैं। यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है। इस संबंध में मा. उच्च न्यायालय में एक अवमानना याचिका भी दायर की गई थी, जिसे मा. न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि छभ्।प् सभी वैधानिक एवं पर्यावरणीय आवश्यकताओं का पालन करते हुए माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का पूर्ण अनुपालन कर रहा है। परियोजना का निर्माण सभी आवश्यक वन एवं पर्यावरणीय स्वीकृतियाँ तथा सक्षम प्राधिकारियों से आवश्यक अनुमतियाँ प्राप्त होने के उपरांत ही प्रारंभ किया गया है। परियोजना के प्रत्येक चरण में न्यायालय के निर्देशों, वन एवं पर्यावरण संबंधी स्वीकृतियों तथा निर्धारित शर्तों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण का विश्वास है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। भानियावालादृजॉलीग्रांटदृऋषिकेश परियोजना इसका उदाहरण है, जहाँ आधुनिक सड़क अवसंरचना के साथ-साथ वन संरक्षण, जैव विविधता और हरित आवरण को समान महत्व देते हुए कार्य किया जा रहा है। छभ्।प् भविष्य में भी सतत विकास के सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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