Latest news
23 अक्टूबर से उत्तराखण्ड में फिर मौसम के करवट लेने के आसार देहरादून में पहली बार नए और भव्य परिसर में होगा विरासत महोत्सव पुलिस स्मृति दिवस पर सीएम धामी ने की कई घोषणाएं, 1600 पदों को जल्द भरने का ऐलान स्वच्छ सर्वेक्षण अभियान के तह्त शहर में चला विशेष सफाई अभियान, 40 टन कूड़ा उठाया गया राजीव गांधी नवोदय विद्यालयों का होगा संपूर्ण कायाकल्प केदारनाथ धाम के कपाट 11 नवंबर को होंगे बंद मुख्यमंत्री ने शारदीय नवरात्रि की महानवमी पर किया हवन एवं कन्या पूजन सिमोग में दशहरा पर्व समारोह में शामिल हुए संस्कृति मंत्री महाराज पांच वर्षों में 35 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियां प्रदान की गईंः सीएम मुख्यमंत्री बन्नू बिरादरी द्वारा परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित दशहरा महोत्सव में हुए शामिल

[t4b-ticker]

Thursday, October 22, 2026
Homeउत्तराखण्डमासिक धर्म को लेकर किशोरियों में जागरूकता की आवश्यकताः डा. सुजाता संजय

मासिक धर्म को लेकर किशोरियों में जागरूकता की आवश्यकताः डा. सुजाता संजय

देहरादून। हर वर्ष 28 मई को पूरे विश्व में विश्व मासिक धर्म दिवस मनाया जाता है। मुख्य उद्देश्य समाज को एक स्वस्थ संदेश देना है कि हमारी मां, बहनें व बेटियां कैसे स्वच्छ और स्वस्थ रहें। क्योंकि एक स्वस्थ्य महिला ही रहकर एक स्वस्थ्य समाज का निमार्ण कर सकती है। इस स्वच्छता एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का एक महत्वपूर्ण कदम है-मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता। आज विज्ञान और तकनीक के इस आधुनिक दौर में भी मासिक धर्म को लेकर समाज में झिझक, मिथक और गलत धारणाएँ मौजूद हैं। कई लड़कियाँ आज भी पीरियड्स के बारे में खुलकर बात करने से डरती हैं, जिसके कारण वे सही जानकारी और उचित स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रह जाती हैं। संजय आॅर्थोपीडिक, स्पाइन एवं मैटरनिटी सेंटर की स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डाॅ. सुजाता संजय का मासिक धर्म दिवस में बालिकाओं को जागरूक करने का एक लक्ष्य माना जा सकता है कि उनके द्वारा किसी भी तरीके से बालिकाओं एवं किशोरियों को मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता के बारे में जागरूक करने की ठानी है। एक स्त्री रोग विशेषज्ञ होने के नाते मेरा मानना है कि मासिक धर्म केवल एक जैविक प्रक्रिया नहीं, बल्कि महिलाओं के स्वास्थ्य, आत्मसम्मान और अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विषय है। यदि सही जानकारी और स्वच्छता का ध्यान रखा जाए, तो महिलाएँ स्वस्थ और आत्मविश्वासपूर्ण जीवन जी सकती हैं।
मासिक धर्म महिलाओं के शरीर में होने वाली एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। हर महीने गर्भाशय की अंदरूनी परत बनती है ताकि गर्भधारण होने पर भ्रूण को पोषण मिल सके। जब गर्भधारण नहीं होता, तब यह परत रक्त के रूप में शरीर से बाहर निकलती है। यही प्रक्रिया मासिक धर्म कहलाती है। सामान्यतः यह चक्र 21 से 35 दिनों के बीच होता है और 3 से 7 दिनों तक चल सकता है।
पीरियड्स किसी बीमारी का संकेत नहीं हैं, बल्कि यह महिलाओं के स्वस्थ प्रजनन तंत्र का एक सामान्य हिस्सा है। फिर भी समाज में इसे लेकर शर्म और संकोच का माहौल बना हुआ है, जो बदलना बेहद जरूरी है। मासिक धर्म के दौरान शरीर अधिक संवेदनशील हो जाता है। यदि इस समय स्वच्छता का ध्यान न रखा जाए, तो संक्रमण, खुजली, त्वचा संबंधी समस्याएँ और प्रजनन तंत्र से जुड़ी कई बीमारियाँ हो सकती हैं। खराब हाइजीना महिलाओं के शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है। कई ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर क्षेत्रों में आज भी लड़कियाँ पुराने कपड़े, राख या अन्य असुरक्षित चीजों का उपयोग करती हैं। यह गंभीर संक्रमण और स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। इसलि मासिक धर्म स्वच्छता के प्रति जागरूकता फैलाना अत्यंत आवश्यक है। पीरियड्स के दौरान सेनेट्री नेपकिन या साफ कपड़ा टैम्पोन और मेंस्ट्रुअल कप जैसे सुरक्षित उत्पादों का उपयोग करना चाहिए। हर महिला अपनी सुविधा और आवश्यकता के अनुसार सही विकल्प चुन सकती है। सेनेटरी पैड को दिन में दो बार बदलना चाहिए। लंबे समय तक एक ही पैड उपयोग करने से बैक्टीरिया बढ़ सकते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पैड बदलने से पहले और बाद में हाथों को साबुन से अच्छी तरह धोना चाहिए। यह संक्रमण से बचाव के लिए बेहद जरूरी है। कई लड़कियों को पहला पीरियड आने से पहले इसकी सही जानकारी नहीं होती।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments