Latest news
उत्तराखंड क्रांति दल ने लिया नए उत्तराखंड का संकल्प भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ ने किया एनजीओ समन्वय एवं विकास सम्मेलन का आयोजन मुख्य सचिव ने आयुष मंत्रालय के सचिव से की मुलाकात अब जनता बनाएगी एमडीडीए की नई पहचान, मैस्कॉट डिजाइन पर मिलेगा 50 हजार का इनाम टिहरी मेडिकल कालेज की स्थापना को लेकर मुख्यमंत्री से स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल एवं विधायक किशोर ... ‘जन जन की सरकार-जन जन के द्वार’ कार्यक्रम के दूसरे चरण में 1.34 लाख लोगों की भागीदारी मुख्यमंत्री ने 11 स्वच्छ ईंधन आधारित वाहनों को किया फ्लैग ऑफ मंत्री जोशी ने मसूरी विधानसभा क्षेत्र में अतिवृष्टि प्रभावित क्षेत्र में हुए नुकसान का जायजा लिया 17 गुणा विदेशी सैलानी वृद्धि से पर्यटन प्रदेश के स्वर्णिम दौर का आगाज भाजपा महिला मोर्चा के ‘लखपति दीदी सम्मेलन’ से गूंज रहे उत्तराखण्ड के विधानसभा क्षेत्र

[t4b-ticker]

Monday, August 3, 2026
Homeउत्तराखण्डभू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद

भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए हुए बंद

देहरादून। भू बैकुंठ बदरीनाथ धाम के कपाट आज विधि विधान के साथ बंद कर दिए गए। इसी के साथ इस वर्ष के लिए चारधाम यात्रा का समापन हो गया है। दोपहर ठीक 2 बजकर 56 मिनट पर वैदिक मंत्रोच्चारण और विधि-विधान के साथ शीतकाल के बदरीनाथ धाम के कपाट बंद हुए। इस दौरान प्रांगण में करीब 5000 श्रद्धालु मौजूद रहे। सेना के बैंड का मधुर धुन के बीच बदरी विशाल की जय के उद्घोष के साथ भगवान उद्धव,कुबेर जी की मूर्ति और शंकराचार्य जी की गद्दी को शीतकालीन प्रवास स्थल के लिए रवाना किया गया। बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के बंद कर दिए हैं। कपाट मंगलवार को दोपहर 2.56 बजे विधि-विधान से बंद कर दिए गए। कई लोग इस खास पल के साक्षी बने। इस मौके पर बदरी विशाल के दरबार को फूलों से सजाया गया। जिससे धाम की छटा देखते ही बन रही थी।
मंदिर के सिंह द्वार की अद्भुत मनोरम छठा देख श्रद्धालु भाव विभोर हुए। अब तक करीब 16 लाख 55 हजार श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंचे हैं। वहीं, 26 नवंबर को उद्धव जी, कुबेर जी व शंकराचार्य जी की गद्दी डोली पांडुकेश्वर पहुंचेगी। बता दें कि बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर बंद हो गए हैं। इस दौरान बदरीनाथ धाम को 12 क्विंटल गेंदे के फूलों से सजाया गया था। सेना के बैंड की धुन और भगवान बदरी विशाल के जयकारों से धाम गूंज उठा। इसके साथ ही भगवान बदरी विशाल की स्वयंभू मूर्ति, भगवान उद्धव और कुबेर जी मूर्ति अपने शीतकालीन प्रवास स्थल की ओर रवाना हो गई है।
बदरीनाथ धाम में 21 नवंबर से पंच पूजाएं शुरू हो गई थी। गणेश मंदिर, आदि केदारेश्वर और आदि गुरु शंकराचार्य गद्दी स्थल के कपाट बंद होने के बाद धाम में वेद ऋचाओं का वाचन भी समाप्त हो गया था। सोमवार को माता लक्ष्मी मंदिर में विशेष पूजाओं के साथ पंच पूजाओं की श्रृंखला पूरी हो गई। आज रावल (मुख्य पुजारी) ने माता लक्ष्मी मंदिर में जाकर उन्हें बदरीनाथ गर्भगृह में विराजमान होने के लिए आमंत्रण दिया। जिसके बाद गृत कंबल लपेटकर कपाट बंद कर दिए गए। अगले वर्ष कपाट खुलने तक माता लक्ष्मी मंदिर परिक्रमा स्थल पर स्थित मंदिर में विराजमान रहेंगी।
इस बार केदारनाथ व बदरीनाथ धाम में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं ने रिकॉर्ड बनाया है। बीते वर्ष केदारनाथ धाम में 16.51 लाख व बदरीनाथ धाम में 14.35 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने दर्शन किए थे। इस बार केदारनाथ में 17.68 लाख से अधिक व बदरीनाथ धाम में 16.53 लाख दर्शन कर चुके हैं। उत्तरकाशी जिले में आपदा के कारण यमुनोत्री व गंगोत्री धाम की यात्रा प्रभावित रहने से श्रद्धालुओं की संख्या में कम रही। बावजूद इसके चारधामों में दर्शन करने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा 51 लाख पहुंच गया, जबकि पिछले साल 48 लाख ने दर्शन किए थे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments