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Thursday, July 23, 2026
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धर्म संसद में नफरती भाषणों पर एसआईटी की जाँच में तेजी,जल्द होगी चार्जशीट तैयार

देहरादून: बीते माह हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में नफरती भाषण के मामले में एसआईटी ने अपनी जांच के तहत बुधवार को इससे जुड़े गवाहों के बयान दर्ज किए हैं। वहीं धर्म संसद के दौरान वायरल वीडियो क्लिप भी एकत्र की गई है। खबर के मुताबिक एसआईटी जल्द इस मामले में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट तैयार कर कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल करेगी।

17 से 19 दिसंबर तक हरिद्वार के खड़खड़ी स्थित स्थित वेद निकेतन में आयोजित धर्मसंसद के दौरान नफरती भाषण के वीडियो वायरल होने के बाद ज्वालापुर निवासी गुलबहार खां ने शिया वक्फ बोर्ड, यूपी के पूर्व चेयरमैन जितेंद्र नारायण त्यागी उर्फ वसीम रिजवी के खिलाफ नगर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में मुकदमे में चार संतों के नाम भी जोड़े गए। जिसके बाद एसआईटी का गठन किया गया।

एसआईटी टीम का नेतृत्व कर रहीं एसपी देहात देहरादून कमलेश उपाध्याय मंगलवार को हरिद्वार पहुंचीं। उन्होंने एसआईटी के सदस्यों के साथ बैठक कर मामले में कार्रवाई की रणनीति बनाई। जिसके बाद एसआईटी की जाँच में तेजी देखने को मिलीI

इस मामले में धर्म संसद के संयोजक एवं शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि धर्म संसद की बढ़ती लोक प्रसिद्धि से देश में जिहादी मानसिकता वाले लोग परेशान हैं। वे धर्म संसद रोकने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए कुचक्र रच रहे हैं। हिंदू विरोधी मानसिकता वाले लोग हिंदू समाज को बदनाम करने का प्रयास कर रहे हैं। स्वामी आनंद स्वरूप ने कहा कि आगामी धर्म संसदों का आयोजन अलीगढ़, कुरुक्षेत्र और हिमाचल प्रदेश में होना है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं वकील कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में धर्म संसदों पर रोक लगाने के लिए याचिका दायर की थी। आनंद स्वरूप ने दावा किया कि कोर्ट ने रोक लगाने से मना कर दिया है। उन्होंने कहा कि कपिल सिब्बल हिंदू विरोधी ताकतों के साथ खड़े रहते हैं। भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठा चुके हैं। सिब्बल के पीछे कौन लोग हैं, इसकी भी जांच होनी चाहिए।

फिलहाल इसको लेकर मुख्यमंत्री कार्यालय का कहना है कि कोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद सरकार अपना पक्ष रखेगी।

वहीं इस मामले पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सरकार कोर्ट के आदेश की प्रति प्राप्त होने के बाद इसे देखेगी। इसका अध्ययन करने के बाद जो कानून सम्मत होगा, उसके हिसाब से कोर्ट में जवाब दाखिल करेंगे। हमारी सरकार कानून का पालन करने वाली सरकार है।

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