Latest news
एफडीए का बड़ा अभियान, दूध-पनीर समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने जांच को भेजे घ्सशस्त्र सीमा बल क्षेत्रक मुख्यालय अल्मोड़ा में स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का हुआ आयोजन देहरादून में दलहन उत्पादन को बढ़ाने को क्लस्टर आधारित माइक्रोप्लानिंग पर जोर हर रविवार गांव पहुंचेगा भाजपा एनजीओ प्रकोष्ठ, एक घंटा करेगा समाज के नाम तमकनाला आपदा पर सीएम धामी की सीधी नजर मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं देवराणा मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए धनराशि स्वीकृत करने के लिए सीएम का आभार व्यक्त किया शिक्षा मंत्री डाॅ. रावत ने पौड़ी से किया ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का शुभारम्भ हेमकुंड साहिब के कपाट 10 अक्टूबर को होंगे बंद मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों के साथ की वर्चुअल बैठक

[t4b-ticker]

Wednesday, August 12, 2026
Homeउत्तराखण्डस्वास्थ्य मंत्री ने किया डायलिसिस मशीन का लोकार्पण, मरीजों को मिलेगा लाभ

स्वास्थ्य मंत्री ने किया डायलिसिस मशीन का लोकार्पण, मरीजों को मिलेगा लाभ

श्रीनगर गढ़वाल। बेस हॉस्पिटल में नव स्थापित इमरजेंसी डायलिसिस यूनिट का प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने लोकार्पण किया। डायलिसिस की नई मशीन स्थापित होने के बाद मरीजों को इसका लाभ मिलेगा। विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती होने के बाद यहां मरीजों की रूटीन डायलिसिस की सुविधा बहाल की जाएगी।
नई डायलिसिस मशीन के लोकार्पण के अवसर पर प्रदेश के चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि मशीनों के समय-समय पर देखरेख का जिम्मा अब बेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक व उनकी टीम के अधीन रहेगा। जिसमें एक फिजिशियन व एक एनेस्थेटिस्ट के साथ ट्रेंड नर्सिंग आफिसर व नोडल (मेंटेनेंस ) रहेंगे। उन्होंने बेस अस्पताल के एमएस की टीम को समय-समय पर मशीनों से लेकर डायलिसिस सेवा की मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। धन सिंह रावत ने हॉस्पिटल प्रशासन को कहा कि भविष्य में पूर्व की भांति दिक्कतें नहीं आनी चाहिए। इस मौके पर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ। सीएमएस रावत सहित तमाम विशेषज्ञ चिकित्सक, डायलिसिस टीम व सपोर्टिंग स्टाफ के साथ जनप्रतिनिधिगण उपस्थित रहे।
विदित हो कि बेस अस्पताल श्रीकोट में पिछले लंबे समय से डायलिसिस मशीन खराब थी, जिसे ठीक करने के लिए अस्पताल प्रशासन ने कई बार प्रयास किए। इसके साथ ही एआरओ (रिवर्स ऑस्मोसिस) मशीन भी बदली गई, लेकिन इसका भी कोई सकारात्मक परिणाम नहीं निकला। इस कारण से मशीन करीब दो माह तक बंद पड़ी रही, जिसके चलते मरीजों को डायलिसिस के लिए देहरादून या ऋषिकेश जाना पड़ता था। इससे मरीजों को न केवल समय की बर्बादी झेलनी पड़ी, बल्कि आर्थिक रूप से भी भारी खर्च उठाना पड़ा। मरीजों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ कई बार आंदोलन भी किया। इन प्रयासों के बाद अस्पताल में एक नई डायलिसिस मशीन स्थापित की गई। उम्मीद है कि इससे मरीजों को अब बेहतर और सुगम सेवाएं मिलेंगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments