Latest news
महिला आरक्षण पर विशेष सत्र स्वागतयोग्य, कांग्रेसी प्रदर्शन ढोंगः महेंद्र भट्ट आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के निर्माण में बड़ी पहल युवा राष्ट्रहित के लिए सदैव खड़े रहेंः डॉ. धन सिंह रावत प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 14 ग्रामों के समग्र विकास पर जोर चारधाम यात्रा से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई, भ्रामक वीडियो पर एफआईआर दर्ज टिहरी में नैल-कोटी कॉलोनी मार्ग पर वाहन दुर्घटना में आठ लोगों की मौत उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम मुख्यमंत्री धामी पहुंचे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा, विकास कार्यों का लिया जायजा मुख्यमंत्री धामी ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान की गहन समीक्षा की

[t4b-ticker]

Friday, April 24, 2026
Homeउत्तराखण्डकालागढ़ डैम के नजदीक जर्जर आवास होंगे ध्वस्त, नैनीताल हाईकोर्ट ने दी...

कालागढ़ डैम के नजदीक जर्जर आवास होंगे ध्वस्त, नैनीताल हाईकोर्ट ने दी अनुमति

नैनीताल। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन पौड़ी को कालागढ़ बांध के समीप खाली व जर्जर आवासों को ध्वस्त करने की अनुमति दे दी है। मुख्य न्यायधीश जी नरेंद्र व न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ में जिलाधिकारी पौढ़ी के ध्वस्तीकरण के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई हुई जिसमें पौड़ी गढ़वाल के जिला मजिस्ट्रेट आशीष कुमार चौहान ने न्यायालय में हलफनामा दायर कर बताया कि कालागढ़ क्षेत्र में 72 खाली और जर्जर संरचनाएं पाई गई हैं, जो अब पूरी तरह से ढहने की स्थिति में हैं। इसके अतिरिक्त, 25 अन्य संरचनाएं, जो पहले सिंचाई विभाग से वन विभाग को हस्तांतरित की गई थीं, भी खस्ताहाल स्थिति में हैं और इन्हें ध्वस्त करने की आवश्यकता है। बता दें कालागण कल्याण एवं उत्थान समिति द्वारा जिलाधिकारी पौड़ी के ध्वस्तीकरण के आदेश को चुनौती दी गई थी।
12 फरवरी 2025 को किए गए संयुक्त निरीक्षण में राजस्व, वन, सिंचाई और पुलिस विभागों के अधिकारियों ने इन सभी ढांचों का विस्तृत सर्वेक्षण किया, जिसमें पाया गया कि यह क्षेत्र कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र के अंतर्गत आता है। चूंकि यह इलाका वन्यजीव संरक्षण के लिए आरक्षित है, इसलिए यहां अवैध निर्माणों और मानव निवास की अनुमति नहीं दी जा सकती।
कोर्ट ने प्रस्तुत साक्ष्यों और फोटोग्राफ्स को देखने के बाद माना कि ये संरचनाएं पूरी तरह से खस्ताहाल, जर्जर और मानव निवास के लिए अनुपयुक्त हो चुकी हैं। न्यायालय ने कहा कि इन ढांचों के बने रहने से वन्य जीवों को खतरा हो सकता है, क्योंकि यह संरचनाएं कभी भी गिर सकती हैं और वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा बन सकती हैं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी कि कुछ संरचनाओं की छतें अन्य मकानों से जुड़ी हुई हैं, लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया। इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट और जिम कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक को निर्देश दिया कि वे सार्वजनिक नोटिस जारी कर, कम से कम 15 दिनों की सूचना के बाद इन ढांचों को ध्वस्त करें।
साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जहां लोग स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं, उन संरचनाओं को कोई क्षति न पहुंचे, न्यायालय ने प्रशासन को यह प्रक्रिया यथाशीघ्र और कुशलतापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए हैं, डीएम और टाइगर रिजर्व निदेशक को न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट भी प्रस्तुत करनी होगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments