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Friday, April 24, 2026
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राजनीति के बजाय तेलांगना में बन रहे मंदिर की शिकायत अपने सीएम से करने का साहस करें कांग्रेस

देहरादून। भाजपा ने धामों और पावन स्थलों के नाम पर अन्यत्र ट्रस्ट, संस्था आदि पर रोक के कैबिनेट निर्णय को पुजारी, पुरोहितों एवं अन्य वर्गों की चिंता दूर करने वाला बताया है। प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने धामी के निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि देवभूमि के देवतुल्य स्वरूप को बनाए रखने के लिए मुख्यमंत्री धामी का योगदान हमेशा याद किया जाएगा । साथ ही तेलंगाना में ऐसे ही मंदिर निर्माण को लेकर कांग्रेसी आरोपों पर पलटवार कर कहा कि वहां उनकी सरकार हैं, उन्हें साहस कर यहाँ राजनीति के बजाय अपने मुख्यमंत्री से शिकायत करनी चाहिए।
पार्टी मुख्यालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत में कैबिनेट के निर्णयों का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कहा कि मुख्यमंत्री देश भर में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को लेकर ऐतिहासिक एवं साहसिक कदमों के लिए जाने जाते हैं । उनकी कैबिनेट का यह निर्णय कि कोई भी चार धामों या यहां के प्रमुख धाम माने जाने वाले धार्मिक स्थलों के नाम से कोई भी ट्रस्ट या संस्था नहीं बना सकेगा, भी इसका एक उदाहरण है । इस शानदार एवं दूरदर्शी कानून के बनने के उपरांत प्रदेश के पंडा, पुरोहित, संत समाज में फैली भ्रांति एवं आशंका पर पूरी तरह समाप्त हो गई है ।
भट्ट ने निशाना साधते हुए कहा कि धामी सरकार के इस निर्णय के बाद, इस मुद्दे पर कांग्रेस की राजनैतिक यात्रा भी औचित्यहीन हो गई है। वे केदारनाथ में उपचुनाव और सफल चार यात्रा को प्रभावित करने के उद्देश से यह यात्रा निकाल रहे थे । ऐसे में सरकार के कदम ने यात्रा को लेकर उनके मकसद पर ही ब्रैक लगा दिए हैं। अब उन्हें स्पष्ट करना चाहिए कि वे किस लिए यात्रा निकाल रहे हैं। धाम के नामों के इस्तेमाल पर लगाई गई इस रोक के खिलाफ यात्रा निकाल रहे हैं या चार धाम यात्रा, कांवड़ यात्रा को प्रभावित करने के लिए यात्रा निकाल रहे हैं । मुख्यमंत्री धामी के पावन धामों की महत्ता बरकरार रखने की दृष्टि से किये इस प्रयास ने विपक्षी झूठ के गुब्बारे की हवा निकाल दी है ।
इस दौरान तेलंगाना में धाम के नाम से बनने वाले मंदिर को लेकर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, मंदिर तेलंगाना में बन रहा है, जहां कांग्रेस की सरकार है । लिहाजा भाजपा से शिकायत करने या यहां राजनैतिक यात्रा के बजाय, उन्हें अपने मुख्यमंत्री से तत्काल बात करने का साहस करना चाहिए । यदि ऐसा करें तो उन्हें अपनी पार्टी के आलाकमान और संगठन में देवभूमि को लेकर एहमियत का अंदाजा हो जाएगा। क्योंकि संसद एवं दूसरे राज्यों में सनातन विरोधी बयान एवं काम और उत्तराखंड में सनातन प्रेम का ढोंग, दोनों एक साथ नहीं चल सकते हैं । प्रदेशवासी कांग्रेस का दोगलापन देख रही है और उन्हें लोकतान्त्रिक ढंग से सबक सिखाती रहेगी। यूपी की तरह हरिद्वार में भी कांवड़ यात्रा को लेकर राज्य सरकार की गाइडलाइन का स्वागत करते हुए सफल और सुरक्षित यात्रा के लिए जरूरी बताया। किसी भी यात्रा को व्यवस्थित बनाने के लिए सरकार इस तरह की व्यवस्थाएं करती रहती है । लिहाजा जो लोग बिना उद्देश्य को जाने, राजनैतिक मकसद से प्रश्न खड़ा कर रहे हैं वे सभी यात्रा की पवित्रता और सुरक्षा के विरोधी हैं। कांग्रेस को खुले मन से इस निर्णय का स्वागत करना चाहिए और देव भूमि की सनातन परंपरा के खिलाफ अपने रोष को सीमित कर सहयोगी की भूमिका मे आना चाहिए। उन्होंने राज्य में हिंदू स्टडी सेंटर की स्थापना को लेकर पूछे सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा, देवभूमि सनातन संस्कृति की ध्वजवाहक है और यहां से सनातन का संदेश सबका मार्गदर्शन करता है । ऐसे में यहां इस तरह के केंद्र का बनना, सनातनी और हिन्दू संस्कृति संवर्धन और प्रचार प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इसी तरह उन्होंने किसानों के ऋण में स्टाम्प ड्यूटी की छूट और 5 लाख तक के ठेके स्थानीय ठेकेदारों को देने को भी जनहित में जरूरी कदम बताया।

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