Latest news
चारधाम यात्रा के लिए सरकार पूरी तरह से तैयारः महाराज आयुष्मान के बेहतरी को प्रयासों में गंभीरता जरूरीः डा धन सिंह रावत गृहमंत्री के दौरे से पहले देहरादून प्रशासन अलर्ट, डीएम ने एसएसपी संग व्यवस्थाओं का किया निरीक्षण सारा की उच्चाधिकार प्राप्त समिति की बैठक आयोजित हाई पावर कमेटी ने 187.11 करोड़ की वार्षिक कार्ययोजना को दी मंजूरी महाराज ने नेपाल चुनाव में बालेंद्र शाह की प्रचंड जीत पर दी बधाई देहरादून में नगर निगम का पहला फूड कोर्ट डेस्टिनेशन अंतिम चरण में, जल्द होगा जनता को समर्पित टिहरी झील बनेगी विश्व में पर्यटन-खेल का प्रमुख केंद्रः सीएम 17 लाख से अधिक लाभार्थियों ने उठाया आयुष्मान योजना का लाभः डॉ. धन सिंह डीएम देहरादून सविन बंसल ने राज्य के आंगनबाड़ी केंद्रों पर राशन आपूर्तिकर्ता सेंट्रल गोदाम रुड़की में क...

[t4b-ticker]

Saturday, March 7, 2026
Homeराजनीतिबलिदानी सैनिकों का हक छीनने. सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई भाजपा सरकार:...

बलिदानी सैनिकों का हक छीनने. सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गई भाजपा सरकार: करन माहरा

देहरादून: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने राज्य सरकार पर सैन्य प्रेम का दिखावे करने की बात कहते हुए तंज कसा है I उन्होंने राज्य सरकार पर देश के लिए बलिदान देने वाले सैनिकों का हक मारने का आरोप लगाया है I

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने सोमवार को कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता दीपक बल्यूटिया के कैंप कार्यालय में आयोजित प्रेसवार्ता में प्रदेश सरकार पर निशाना साधते हुए बताया कि मार्च 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने सैनिकों के सम्मान में एक शासनादेश जारी किया था। जिसके तहत युद्ध व आतंरिक सुरक्षा में जुटे सैनिक व अर्द्धसैनिक के बलिदानी होने पर आश्रितों को एकमुश्त दस लाख रुपये की अनुग्रह अनुदान राशि दी जाने लगी।

इस शासनादेश के चलते वीर नारी को छह लाख व माता-पिता को चार लाख रुपये का प्रविधान था। माता-पिता के जीवित नहीं होने पर पूरे पैसे पत्नी को मिलते थे। वीर नारी के निधन की स्थिति में छह लाख रुपये बच्चों व चार लाख माता-पिता को मिलने थे। इस शासनादेश के बाद राज्य भर से आवेदन आने लगे। लेकिन आवेदकों की संख्या बढऩे पर 2020 में भाजपा की सरकार ने एक्ट के जरिये निर्णय लिया कि पांच मार्च 2014 से पहले के मामलों में राशि नहीं मिलेगी। इस दोहरे मापदंड के विरुद्ध कुछ परिवार हाई कोर्ट पहुंच गए। निर्णय सैन्य परिवारों के पक्ष में आया।

बताया कि हाई कोर्ट के इस निर्णय के विरुद्ध अब राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई है। नौ दिसंबर को मामले की सुनवाई होगी। यह सारी प्रक्रिया इसलिए की जा रही है ताकि पांच मार्च 2014 से पहले देश के लिए बलिदान होने वाले सैनिक के परिवार को पैसे न देने पड़े। सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए माहरा ने कहा कि राज्य सरकार देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वालों सैनिकों के स्वजन का अधिकार छीनने का हरसंभव प्रयास कर रही है।

इस दौरान प्रेसवार्ता में जिलाध्यक्ष राहुल छिमवाल, पीसीबी मेंबर सतीश नैनवाल मौजूद रहे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments