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Thursday, April 23, 2026
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पुलिस महानिरीक्षक ने एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कार्यों की समीक्षा की

देहरादून। पुलिस महानिरीक्षक, गढ़वाल परिक्षेत्र उत्तराखण्ड के द्वारा परिक्षेत्र के सातों जनपदों में व्यवस्थापित एन्टी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट के कार्यों की समीक्षा के लिए परिक्षेत्रीय कार्यालय देहरादून में जनपदों के एएचटीयू नोडल ऑफिसर, एएचटीयू प्रभारी तथा उपनिरीक्षकों की बैठक ली गई। बैठक में प्रत्येक जनपद के एएचटीयू के नियतन को चैक किया गया तथा निर्देशित किया गया कि एएचटीयू में नियुक्त प्रत्येक अधिकारी/कर्मचारी का कार्य वितरण किया जाये। एएचटीयू में लम्बित विवेचनाओं की समीक्षा की गयी, जिनमें जनपदवार विवरण इस प्रकार पाया गयाः-जनपद देहरादून 6, जनपद हरिद्वार-8, जनपद पौड़ी-1 शामिल है। गुमशुदगी की विवेचनाओं की जांच हेतु जारी की गयी एस.ओ.पी. के सम्बन्ध में सभी को ब्रीफ किया गया तथा एस.ओ.पी. की प्रति पुनः उपलब्ध त्रकरायी और निर्देशित किया गया कि एस.ओ.पी. में दिये गये निर्देशों के अनुरूप शत्-प्रतिशत कार्यवाही अमल में लायी जाये।इसी क्रम में 05 वर्षों के गुमशुदगी बरामदगी की समीक्षा की गयी, साथ ही विगत 03 वर्षों में गुमशुदा हुए बालक/बालिकाओं, जिनकी बरामदगी नहीं हुई है की भी क्रमवार समीक्षा कर निर्देश जारी किये गये।
एएचटीयू को निर्देशित किया गया कि वह अपने-अपने कार्यालयों में विधिवत् रजिस्टर व्यवस्थित करेंगें, जिसमें जनपद में स्थापित सैल डीसीआरबी थानों के अतिरिक्त वह भी गुमशुदा बच्चों, महिला एवं पुरुषों के विवरण का अभिलेखीयकरण करेंगें। इसके अतिरिक्त प्रत्येक जनपद की ।भ्ज्न् के पास बरामदगी हेतु शेष गुमशुदाओं के मोबाईल/अन्तिम लोकेशन से सम्बन्धित डिटेल होनी चाहिए तथा वह इस सम्बन्ध में सम्बन्धित थानों को सहयोग प्रदान करेंगें। एएचटीयू का यह भी दायित्व होगा कि वह जनपद में बरामद होने वाले लावारिस शवों की भी सूचना का अभिलेखीयकरण करेंगें। बैठक में यह भी दिशा निर्देश दिये गये कि मानव तस्करी में संलिप्त अभियुक्तों का डाटाबेस तैयार किया जाये तथा सीमावर्ती प्रदेशों से भी मानव तस्करी में संलिप्त व्यक्तियों की सूची मांगकर डाटाबेस में शामिल की जाये। परिक्षेत्र के जनपदों में इस प्रकार की शिकायतें भी प्राप्त होती है कि बाहरी प्रदेशों के लोगों के द्वारा कुछ क्षेत्रों से लड़कियों/उनके परिजनों को प्रलोभन देकर विवाह के लिये ले जाया जाता है, जिसमें उनके शोषण होने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता है। ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित किया जाये तथा यह सुनिश्चित किया जाये कि किसी भी युवती महिला का शोषण न हो। आपदा में अनाथ हुए बच्चों का डाटाबेस तैयार किया जाये तथा जिला प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर यह सुनिश्चित किया जाये कि इन बच्चों की पूरी देखभाल व इनके पास यथोचित आश्रय आदि अन्य मूलभूत सुविधायें उपलब्ध है। प्रायः यह भी शिकायते मिलती है कि भिक्षावृत्ति में लिप्त लोग नाबालिग बच्चों को अपने साथ रखकर उन्हें अपना पुत्र/पुत्री बताकर भिक्षावृत्ति करवाते हैं। इस हेतु एएचटीयू को निर्देशित किया गया कि वह समय-समय पर भिक्षावृत्ति से सम्बन्धित क्षेत्रों को चिन्हित कर इसमें सम्मिलित व्यक्तियों तथा उनके पास बच्चों के विवरण का अभिलेखीयकरण करेंगें तथा यह सुनिश्चित करायेंगे कि किसी भी नाबालिग बच्चे का शोषण न हो। जनपदों में व्यवस्थापित बाल आश्रय गृहों का सम्बन्धित विभाग जैसे समाज कल्याण विभाग आदि के साथ समन्वय स्थापित कर समय-समय पर भ्रमण करेंगें तथा निर्धारित मानकों के अनुरूप वहां पर मौजूद बच्चों से बातचीत कर उनकी समस्याओं के निराकरण हेतु प्रभावी कदम उठायेंगें। प्रत्येक जनपद प्रभारी की निर्देशित किया गया कि 13 वर्ष से कम बच्चों की गुमशुदगी की जांच पंजीकरण के तत्काल बाद एएचटीयू के सुपुर्द की जाये।

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