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Friday, September 11, 2026
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आईआईटी रुड़की की नई तकनीक का उद्योग में सफल हस्तांतरण

देहरादून। आईआईटी रुड़की ने एक नई तकनीक का उद्योग जगत में सफल हस्तांतरण करते हुए एनर्जीएनव स्मार्ट केमिकल्स एंड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। यह तकनीक नाइट्रोजन-समृद्ध नैनोपोरस पॉलीट्रायज़ीन के उत्पादन के लिए अल्ट्राफास्ट माइक्रोवेव-सहायता प्राप्त संश्लेषण विधि पर आधारित है। इस तकनीक को आईआईटी रुड़की के रसायन विज्ञान विभाग के प्रोफेसर परितोष मोहंती और डॉ. मोनिका चौधरी ने विकसित किया है। इसका शीर्षक है “नाइट्रोजन-समृद्ध उच्च सतह क्षेत्र नैनोपोरस पॉलीट्रायज़ीन के संश्लेषण की प्रक्रिया और उनके बहु-कार्यात्मक अनुप्रयोग“। यह विधि कम समय में अधिक प्रभावी नतीजे देने में सक्षम है।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने इस अवसर पर कहा, “यह समझौता अनुसंधान को प्रभावशाली, वास्तविक दुनिया के समाधानों में बदलने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह तकनीक ‘प्रयोगशाला से बाज़ार’ की दिशा में एक ठोस कदम है जो आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से विकसित भारत के निर्माण में मदद करेगा।“ आईआईटी रुड़की के कुलाशासक (स्रिक) प्रो. विवेक मलिक ने कहा, “हमें गर्व है कि आईआईटी रुड़की में विकसित एक डीप-टेक समाधान अब व्यावहारिक उपयोग में आ रहा है। एनर्जीएनव के साथ यह सहयोग टिकाऊ तकनीकों के विकास को गति देगा।“
इस तकनीक के सह-आविष्कारक प्रो. परितोष मोहंती ने कहा, “यह नई सामग्री हरित ऊर्जा, पर्यावरण और सतत रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अपार संभावनाएं रखती है। इस हस्तांतरण के माध्यम से वर्षों की मेहनत को असली दुनिया में उपयोग होता देखना बहुत संतोषजनक है।“
एनर्जीएनव स्मार्ट केमिकल्स एंड मैटेरियल्स प्राइवेट लिमिटेड की ओर से एम. आर. कटुआल ने कहा, “हम इस नवाचार को अगले स्तर तक ले जाने के लिए आईआईटी रुड़की के साथ साझेदारी को लेकर उत्साहित हैं। इस तकनीक की खासियतें हमारे मिशन दृ उभरते क्षेत्रों के लिए टिकाऊ और स्केलेबल समाधान दृ के अनुरूप हैं।“ यह समझौता आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करता है और स्वदेशी नवाचार, हरित रसायन और स्मार्ट विनिर्माण पर भारत के फोकस को दर्शाता है। यह पहल मेक इन इंडिया की सोच के अनुसार उद्योग-तैयार समाधान विकसित करने की दिशा में एक ठोस कदम है। आईआईटी रुड़की ऐसे प्रयासों के माध्यम से यह सुनिश्चित कर रहा है कि उच्च गुणवत्ता वाला शोध कार्य वास्तविक दुनिया की तकनीकों में बदले और भारत को वैश्विक मंच पर प्रतिस्पर्धी बनाए।

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