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Tuesday, June 2, 2026
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पत्रकारिता दिवस पर मसूरी प्रेस क्लब ने आयोजित की गोष्ठी

मसूरी। मसूरी प्रेस क्लब ने हिंदी पत्रकारिता दिवस पर गोष्ठी आयोजित कर पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डाला गया व वर्तमान समय में आ रही चुनौतियों पर चर्चा की गयी। इस मौके पर बतौर मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने कहा कि पत्रकारों पर बड़ी जिम्मेदारी है, व आम पाठक समाचार पत्रों पर विश्वास करता है व उसी के आधार पर अपनी सोच विकसित करता है।
हिंदी पत्रकारिता दिवस पर मुख्य अतिथि पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी ने पत्रकारिता दिवस की बधाई देते हुए कहा कि पत्रकार अपनी जिम्मेदारियों का निष्पक्ष होकर निर्वहन करें, पत्रकार जनता व शासन प्रशासन के बीच पुल का कार्य करता है व जनता की आवाज उन तक पहुचाने का कार्य करता है जो एक बड़ा माध्यम है, इसलिए उन्हंे लोकतंत्र में चौथा स्तंभ कहा गया है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता ऐसा कार्य है उसमें चुनौतियां बहुत हैं, व लगातार बदलते परिवेश में अपनी भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। इस मौके पर मुख्य वक्ता वरिष्ठ पत्रकार बिजेंद्र पुंडीर ने पत्रकारिता के इतिहास पर प्रकाश डाला व कहा कि सर्व प्रथम विश्व का पहला समाचार पत्र जॉन कार्लाेस ने 1605 में रिलेशन नाम से निकालकर तहलका मचा दिया था। हालांकि भारत में सबसे पहला समाचार पत्र अंग्रेजी में 1780 में हिक्की बंगाल गजट 1780 में निकाला गया व पहला हिंदी समाचार पत्र उदंड मार्तण्ड 30 मई 1826 में जुगल किशोर शुक्ल ने निकाला था। वहीं मसूरी का भी पत्रकारिता में अपना इतिहास रहा है व यहंा से पहला समाचार पत्र द हिल्स 1842 में जॉन मेकनन ने निकाला था, वहीं 1927 में आरपी गुप्ता पहले भारतीय थे जिन्होंने मसूरी से मसूरी हेराल्ड पत्रिका निकाली। इस मौके पर उन्होने तब व आज की पत्रकारिता पर प्रकाश डाला व कहा कि इस क्षेत्र में बहुत तेजी से बदलाव हुए है जो आज सोशल मीडिया तक पहुंच गया है लेकिन उसके बावजूद समाचार पत्रों का स्थान कोई नहीं ले पाया। इस मौके पर मसूरी प्रेस क्लब के अध्यक्ष सुनील सिलवाल ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता को 30 मई 1826 को माना जाता है जब उदंड मार्तण्ड निकाला गया व उसी दिन को हिंदी पत्रकारिता दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि उस समय पत्रकारिता मिशन होता था, लेकिन चुनौतियां तब भी थी आज भी है। आज के दौर की पत्रकारिता भले ही सरल हो गयी है लेकिन चुनौती पूरी है, आज पाठकों को असली व नकली खबरों में अंतर करना कठिन हो गया है, कई बार भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। आज सोशल व डिजिटल मीडिया का जमाना है, लेकिन समाचार पत्रो की विश्वसनीयता आज भी है जो दस्तावेज के रूप में मानी जाती है। सोशल मीडिया ने हर व्यक्ति को पत्रकार बना दिया है, एआई से बात का बतंगड बनाया जा रहा है, यह भी बडी चुनौती है। पत्रकार मैदान के योद्धा है जो हर समय पक्ष व विपक्ष से जूझते रहते है। गोष्ठी में प्रेस क्लब महामंत्री सूरत सिंह रावत, उपाध्यक्ष हरीश कालरा, मोहसिन तन्हा, दीपक रावत, आशीष भटट, शिव अरोड़ा, सुमित कंसल, ने भी पत्रकारिता दिवस पर अपने विचार प्रकट किए। कार्यक्रम में पालिकाध्यक्ष मीरा सकलानी व मुख्य वक्ता बिजेंद्र पुंडीर को शॉल व गुलदस्ता देकर सम्मानित किया गया।

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