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Saturday, August 8, 2026
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मानसून की संभावित देरी एवं वर्षा की कमी से निपटने के लिए राज्य सरकार तैयारः कृषि मंत्री

देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि राज्य सरकार खरीफ सीजन-2026 के दौरान मानसून में संभावित विलंब अथवा वर्षा की कमी की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने यह बात केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चैहान की अध्यक्षता में आयोजित सभी राज्यों के कृषि मंत्रियों की वर्चुअल बैठक में कही।
बैठक में मानसून की संभावित देरी अथवा कम वर्षा की स्थिति में किसानों के हितों की सुरक्षा एवं कृषि उत्पादन को प्रभावित होने से बचाने के लिए आकस्मिक उपायों (कंटिन्जेंसी प्लान) की समीक्षा की गई। इस दौरान भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अंतर्गत सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर ड्राईलैंड एग्रीकल्चर द्वारा तैयार राष्ट्रीय कंटिन्जेंसी प्लान तथा कृषि विज्ञान केंद्रों द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का प्रस्तुतीकरण किया गया। केंद्रीय कृषि मंत्री ने सभी राज्यों को निर्देश दिए कि संभावित परिस्थितियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड कृषि विभाग ने वैज्ञानिक संस्थानों एवं कृषि विशेषज्ञों के सहयोग से सभी जनपदों के लिए विस्तृत कृषि आकस्मिकता योजना तैयार कर ली है। पर्वतीय एवं मैदानी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग रणनीति बनाई गई है, जिससे किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।
उन्होंने बताया कि मानसून में देरी होने की स्थिति में किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा सूखा सहनशील फसलों के गुणवत्तायुक्त बीज उपलब्ध कराए जाएंगे। पर्वतीय क्षेत्रों में मंडुवा, झंगोरा, गहत, भट्ट, राजमा एवं तिल जैसी पारंपरिक फसलों को बढ़ावा दिया जाएगा, जबकि मैदानी क्षेत्रों में धान के विकल्प के रूप में मक्का, मूंग, उड़द, अरहर तथा चारा फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा।
मंत्री जोशी ने कहा कि जल संरक्षण एवं नमी प्रबंधन राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। खेत तालाब, चाल-खाल, कंटूर बंडिंग, सामुदायिक जल स्रोतों के संरक्षण तथा सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। साथ ही किसानों को ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिंचाई अपनाने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के अधिकारी जनपद एवं विकासखंड स्तर पर लगातार मौसम एवं कृषि गतिविधियों की निगरानी कर रहे हैं। प्रदेशभर में संचालित श्खेत बचाओ अभियानश् के माध्यम से किसानों को वैज्ञानिक खेती, फसल प्रबंधन, मौसम आधारित कृषि सलाह, वैकल्पिक फसल प्रणाली तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि मंत्री ने प्रदेश के किसानों से अपील की कि वे कृषि विभाग द्वारा जारी वैज्ञानिक सलाह का पालन करें तथा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत अपनी फसलों का बीमा अवश्य कराएं। किसी भी समस्या की स्थिति में किसान अपने निकटतम कृषि कार्यालय से संपर्क करें अथवा कृषि विभाग के टोल फ्री नंबर 18001801551 पर जानकारी प्राप्त करें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र एवं राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों, कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन तथा किसानों की सक्रिय सहभागिता से मानसून संबंधी संभावित चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया जाएगा और प्रदेश के किसानों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे। बैठक में कृषि निदेशक दिनेश कुमार, उद्यान निदेशक डॉ. आर.के. सिंह सहित विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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