Latest news
नंदा देवी बायोमॉनिटरिंग एक्सपीडिशन हिमालयी जैव विविधता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण पहलः उनियाल न्याय व्यवस्था को अधिक समावेशी, सुलभ और सुदृढ़ बनाने में ‘‘जूडिशियम 2.0’’ महत्वपूर्ण पहलः मुख्यमंत्री देहरादून की 30 होनहार बेटियों को मिला नई उड़ान का अवसर एसआईआर की शुरुआत, सोमवार से मतदाताओं को बीएलओ घर-घर बांटेंगे गणना फार्म कृषि मंत्री गणेश जोशी ने किसानों से वैज्ञानिक एवं प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वान नरेंद्रनगर पालिका चुनाव का प्रचार थमा, मंत्री सुबोध उनियाल ने भाजपा सभासद प्रत्याशियों के समर्थन में... अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के सफल आयोजन को तैयारियां तेज स्मार्ट सिटी परियोजनाओं की प्रगति, हैंडओवर की स्थिति एवं संचालन-अनुरक्षण कार्यों की डीएम ने की समीक्... उत्तरांचल प्रेस क्लब के स्वास्थ्य शिविर में 142 पत्रकारों ने कराया स्वास्थ्य परीक्षण उत्तराखण्ड में बीएलओ को मिलेगा एक माह के मोबाइल रिचार्ज का भुगतान

[t4b-ticker]

Monday, June 8, 2026
Homeअपराधभ्रष्टाचार: फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दे दिया सड़क चौड़ीकरण...

भ्रष्टाचार: फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दे दिया सड़क चौड़ीकरण का कॉन्ट्रैक्ट

देहरादून: सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में घोटाले से जुडा मामला सामने आया है। आईएसबीटी से अजबपुर रेलवे क्रॉसिंग तक मार्ग चौड़ीकरण का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए फर्म द्वारा फर्जी बैंक गारंटी दिखाई गई। सात अगस्त को कंपनी ने मुंबई के बैंक की 77 लाख 70 हजार बैंक गारंटी का प्रमाण जमा कराया। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर डोईवाला को यह बैंक गारंटी दी गई। बैंक गारंटी की पुष्टि किए बिना ही नौ अगस्त को फर्म को कार्य प्रारंभ होने और पूर्ण होने की तिथि से अवगत करा दिया गया ।

जानकारी के मुताबिक़ मार्ग चौड़ीकरण के कार्य के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय द्वारा इसी वर्ष 25 फरवरी को 42 करोड़ 55 लाख 84 हजार रुपये की धनराशि को स्वीकृति दी गई थी। विभाग ने इसके लिए 26 मार्च को टेंडर निकाले और 11 मई को टेंडर खोले गए , जिसमे अनुमानित लागत से 23.66 प्रतिशत कम 25 करोड़ 90 लाख रुपये में टेंडर डालकर दिल्ली की मैसर्स राकेश कुमार एंड कंपनी ने कॉन्ट्रैक्ट अपने नाम कर लिया। सबसे कम लागत होने के चलते इस कंपनी को ही काम दे दिया गया। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से कंपनी को तीन जुलाई को लैटर ऑफ एक्सेप्टेंस(स्वीकृति पत्र) दे दिया गया।

इस दौरान दोनों इंजीनियरों एसई रणजीत सिंह और ईई ओम पाल सिंह का ट्रान्सफर हो गया। उनके पदों पर आए दूसरे इंजीनियरों ने जब बैंक गारंटी के परीक्षण की रिपोर्ट देखी और जांच की तो पता चला कि यह बैंक गांरटी गलत है। यह सूचना आला अधिकारियों को दी गई तो उन्होंने इसकी प्राथमिक जांच कराई।

जांच में फर्म के फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का मामला स्पष्ट हो गया। इसी जांच के आधार पर शासन ने बैंक गारंटी परीक्षण में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के आरोप में एसई रणजीत सिंह और ईई ओम पाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments