Latest news
अंतर्राष्ट्रीय शतरंज दिवस पर वैदिक ब्लिट्ज शतरंज प्रतियोगिता आयोजित पर्यटन मंत्री महाराज ने पवित्र बौख नाग धाम को पर्यटन स्थल घोषित किया चकराता में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ कार्यक्रम का शुभारंभ आम महोत्सव में बोले मुख्यमंत्री धामी-किसान उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत, हरिद्वार बनेगा विकास की नई पह... मुख्यमंत्री धामी से मिलीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाली उत्तराखंड की महिला मुक्केबाज, मुख्यमं... जल जीवन मिशन की अधूरी परियोजनाएं सर्वोच्च प्राथमिकता से पूरी होंः डीएम कांवड़ यात्रा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सफल आयोजन के लिए सभी तैयारियां समय से पूर्ण करेंः मुख्यमंत... मुख्यमंत्री ने हरिद्वार गंगा कॉरिडोर के अंतर्गत 235 करोड़ रु की परियोजनाओं का किया भूमि पूजन एवं शिला... वन भूमि हस्तांतरण प्रकरणों का समय से करें निस्तारणः महाराज मुख्य सचिव ने उच्च शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक ली

[t4b-ticker]

Thursday, July 23, 2026
Homeअपराधभ्रष्टाचार: फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दे दिया सड़क चौड़ीकरण...

भ्रष्टाचार: फर्जी बैंक गारंटी के आधार पर दे दिया सड़क चौड़ीकरण का कॉन्ट्रैक्ट

देहरादून: सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में घोटाले से जुडा मामला सामने आया है। आईएसबीटी से अजबपुर रेलवे क्रॉसिंग तक मार्ग चौड़ीकरण का कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने के लिए फर्म द्वारा फर्जी बैंक गारंटी दिखाई गई। सात अगस्त को कंपनी ने मुंबई के बैंक की 77 लाख 70 हजार बैंक गारंटी का प्रमाण जमा कराया। पीडब्ल्यूडी के तत्कालीन एग्जीक्यूटिव इंजीनियर डोईवाला को यह बैंक गारंटी दी गई। बैंक गारंटी की पुष्टि किए बिना ही नौ अगस्त को फर्म को कार्य प्रारंभ होने और पूर्ण होने की तिथि से अवगत करा दिया गया ।

जानकारी के मुताबिक़ मार्ग चौड़ीकरण के कार्य के लिए केंद्रीय परिवहन मंत्रालय द्वारा इसी वर्ष 25 फरवरी को 42 करोड़ 55 लाख 84 हजार रुपये की धनराशि को स्वीकृति दी गई थी। विभाग ने इसके लिए 26 मार्च को टेंडर निकाले और 11 मई को टेंडर खोले गए , जिसमे अनुमानित लागत से 23.66 प्रतिशत कम 25 करोड़ 90 लाख रुपये में टेंडर डालकर दिल्ली की मैसर्स राकेश कुमार एंड कंपनी ने कॉन्ट्रैक्ट अपने नाम कर लिया। सबसे कम लागत होने के चलते इस कंपनी को ही काम दे दिया गया। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी की ओर से कंपनी को तीन जुलाई को लैटर ऑफ एक्सेप्टेंस(स्वीकृति पत्र) दे दिया गया।

इस दौरान दोनों इंजीनियरों एसई रणजीत सिंह और ईई ओम पाल सिंह का ट्रान्सफर हो गया। उनके पदों पर आए दूसरे इंजीनियरों ने जब बैंक गारंटी के परीक्षण की रिपोर्ट देखी और जांच की तो पता चला कि यह बैंक गांरटी गलत है। यह सूचना आला अधिकारियों को दी गई तो उन्होंने इसकी प्राथमिक जांच कराई।

जांच में फर्म के फर्जी बैंक गारंटी जमा करने का मामला स्पष्ट हो गया। इसी जांच के आधार पर शासन ने बैंक गारंटी परीक्षण में लापरवाही और वित्तीय अनियमितता के आरोप में एसई रणजीत सिंह और ईई ओम पाल सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जा रही है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments