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Sunday, September 6, 2026
Homeउत्तराखण्डत्रिदिवसीय चाई ग्रामोत्सव, गांव एवं संस्कृति को बचाने का अनूठा अभियान

त्रिदिवसीय चाई ग्रामोत्सव, गांव एवं संस्कृति को बचाने का अनूठा अभियान

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्र के गांवों से लगातार हो रहे पलायन को लेकर चर्चायें होती हैं। इसको लेकर सरकार के स्तर पर पूर्व में पलायन आयोग का भी गठन किया जा चुका है। परंतु पहाड़ के गांवों से पलायन रोकने की दिशा में अब तक न सरकार के द्वारा ही कोई ठोस नीति बन पाई है। और न ही अन्य किसी माघ्यम से। इसका कारण रोजगाार का न होना तो है ही, लेकिन इसके अलावा पलायन कर चुके लोगों का गांव की ओर रुझाान न होना भी मुख्य वजह है।

पलायन कर चुके ग्रामींणों का गांवों के प्रति रुझाान बढ़ाने को लेकर पौड़ी जिले के चाई गांव के लोगों ने एक नायाब तरीका अपनाया है। पिछले कई वर्षों से चाई गांव के समस्त ग्रामीणों के द्वारा चाई ग्रामोत्सव के नाम से यहां भव्य मेले का आयोजन किया जा रहा है।

चाई ग्रामोत्सव प्रतिवर्ष गंगा दशहरा को मई. जून के माह में आयोजित किया जाता है। जिसके तहत सभी आगंतुकों के लिए भोजन एवं आवास की निशुल्क व्यवस्था की जाती है। वहीं प्रत्येक रात्रि को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिसमें उत्तराखंड के जाने माने लोक कलाकार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देते हैं।

ग्रामोत्सव के तहत प्रथम दिवस को उदघाटन समारोह के रुप में ग्राम देवता की पूजा के साथ कलश यात्रा निकाली जाती है। जो कि अति मनमोहक व भव्य होती है। इस दौरान पूरे गांव में भ्रमण किया जाता है। जिसे ग्राम भ्रमण का नाम दिया गया है। ।

दूसरे दिवस को ग्राम विकास संगोष्ठी के साथ कार्यशाला, जादू के शो, कठपुतली के शो जैसे विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के द्वारा मनोरंजन किया जाता है।

तीसरे दिवस .को गांव एवं क्षेत्र से जुड़े विभिन्न सरोकार, समस्याओं पर चर्चा करने के साथ उनके समाधान सहित गांव के विकास की योजना बनाना व पूरे साल के विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की जाती हैं।

अंत में बहुत ही सुंदर तरीके से सभी ग्रामींण भावुक दृष्य के साथ अगले वर्ष फिर ग्रामोत्सव में मिलने की बात कहते हुए भावुकता के साथ इसका समापन समारोह करते हैं। जिसके बाद हवन एवं भंडारा किया जाता है।

चाई ग्रामउत्सव अपने आाप में अब उत्तराखंड में संकृति के साथ गांवों को बचाने व संरक्षण करने सहित ग्राम स्तर पर विलुप्त हुए अपसी भाईचारे को जीवित करने के लिए प्रदेश में रोल मॉडल बन सकता है। चाई गाांव के समस्त ग्रामींणों की इस अनूठी पहल को प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के हर राज्य को भी अपनाना चाहिए।

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