Latest news
मुख्यमंत्री धामी बोले, हिमालयी राज्य आपसी सहयोग और अनुभवों से करें नीति निर्माण उत्तराखंड में डिजिटल जनगणना के प्रथम चरण का फील्ड कार्य 25 अप्रैल से सीएम धामी ने महिला जन आक्रोश रैली में प्रतिभाग किया महिला आरक्षण पर विशेष सत्र स्वागतयोग्य, कांग्रेसी प्रदर्शन ढोंगः महेंद्र भट्ट आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के निर्माण में बड़ी पहल युवा राष्ट्रहित के लिए सदैव खड़े रहेंः डॉ. धन सिंह रावत प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 14 ग्रामों के समग्र विकास पर जोर चारधाम यात्रा से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई, भ्रामक वीडियो पर एफआईआर दर्ज टिहरी में नैल-कोटी कॉलोनी मार्ग पर वाहन दुर्घटना में आठ लोगों की मौत उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

[t4b-ticker]

Friday, April 24, 2026
Homeउत्तराखण्डजनभागीदारी और नैतिक नेतृत्व से ही संभव है वनों का सतत संरक्षणः...

जनभागीदारी और नैतिक नेतृत्व से ही संभव है वनों का सतत संरक्षणः राज्यपाल

देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने कहा कि वनों का संरक्षण, पुनर्जीवन और सतत प्रबंधन जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि वन क्षेत्रों में निवास करने वाले स्थानीय समुदायों को साथ लेकर चलना वन सेवा का मूल दायित्व है। राज्यपाल ने कहा कि वन अधिकारियों को स्थानीय लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार करते हुए उन्हें स्वरोजगार एवं कौशल विकास से जोड़ने के प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि वन अधिकारी वन्यजीवों और प्रकृति को अपने परिवार का अभिन्न अंग मानकर कार्य करें। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) रविवार को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी, देहरादून में आयोजित संजय सिंह स्मृति व्याख्यान में बोल रहे थे। राज्यपाल ने वर्ष 2025 बैच के वन सेवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे अपने अधीन कार्यरत कर्मचारियों और वन कर्मियों के कल्याण और उनके परिवारों की शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, बीमा एवं कौशल प्रशिक्षण जैसे विषयों पर विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का दायित्व केवल प्रशासनिक कार्यों तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह अपने अधीनस्थों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने का भी उत्तरदायी होता है। राज्यपाल ने वन सेवा के अधिकारी स्व. संजय सिंह के साहस, शौर्य, निष्ठा एवं समर्पण को स्मरण करते हुए कहा कि उनका बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि कर्तव्य पालन के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले अधिकारी राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं और उनके आदर्श वन सेवा के प्रत्येक अधिकारी को प्रेरित करते रहेंगे। राज्यपाल ने वन सेवा में नैतिक मूल्यों एवं पारदर्शिता के महत्व को रेखांकित करते हुए अधिकारियों से भ्रष्टाचार से दूर रहने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी की प्रतिष्ठा वर्षों में बनती है और एक गलत निर्णय से क्षणभर में समाप्त हो सकती है। उन्होंने अधिकारियों से प्रशासनिक दक्षता, नैतिक साहस और संवेदनशीलता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने का आह्वान किया। राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय में वन सेवा के समक्ष अवैध खनन, अतिक्रमण, वनाग्नि तथा मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व जैसी गंभीर चुनौतियाँ हैं। इन चुनौतियों का समाधान तकनीक, नवाचार और संवेदनशील दृष्टिकोण के माध्यम से संभव है। उन्होंने इको-टूरिज्म तथा वन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देकर स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने पर बल दिया। इस अवसर पर राज्यपाल ने स्व संजय सिंह के पिता श्री घनश्याम नारायण सिंह एवं श्रीमती कांति को शॉल ओड़ाकर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने वर्ष 2025 बैच में प्रशिक्षण के दौरान श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में वन अकादमी की निदेशक श्रीमती भारती, पीसीसीएफ हॉफ उत्तराखण्ड रंजन कुमार मिश्रा एवं वन अकादमी के अन्य अधिकारी सहित प्रशिक्षु अधिकारी मौजूद रहे।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments