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Tuesday, August 18, 2026
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जल जीवन मिशन के ठेकेदारों का ढाई वर्षों से लंबित देयकों का भुगतान शीघ्र किए जाएः अग्रवाल

देहरादून। देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से एक प्रेस वार्ता का आयोजन सहारनपुर रोड स्थित एक होटल में किया गया। प्रेस वार्ता का मुख्य उद्देश्य जल जीवन मिशन के अंतर्गत पूर्ण एवं प्रगतिरत योजनाओं के सापेक्ष ठेकेदारों के विगत लगभग ढाई वर्षों से लंबित देयकों का भुगतान तत्काल सुनिश्चित किए जाने के सन्दर्भ में रहा। प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए देवभूमि जल शक्ति कांट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित अग्रवाल ने कहा “हर घर नल से जल” माननीय प्रधानमंत्री जी की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी एवं जनकल्याणकारी योजना है। राज्य सरकार के नेतृत्व एवं संबंधित विभाग के निरंतर प्रयासों से इस योजना के अंतर्गत राज्य में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उपलब्ध विवरण के अनुसार 92.46 प्रतिशत कार्य पूर्ण किए जा चुके हैं। कुल 16,555 योजनाओं में से 15,540 योजनाएँ पूर्ण हो चुकी हैं तथा 14.48 लाख परिवारों में से 14.20 लाख परिवारों को पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है। यह उपलब्धि राज्य सरकार, विभागीय अधिकारियों तथा इन योजनाओं को धरातल पर उतारने वाले ठेकेदारों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है।
परंतु अत्यंत गंभीर एवं चिंताजनक स्थिति यह है कि इन योजनाओं के निर्माण एवं क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले ठेकेदारों के वैध देयकों का भुगतान विगत लगभग ढाई वर्षों से लंबित है। ठेकेदारों ने विभागीय निर्देशों के अनुरूप अपने निजी संसाधनों, बैंक ऋण एवं बाजार से प्राप्त उधार के माध्यम से सामग्री, श्रमिक, मशीनरी, परिवहन तथा अन्य आवश्यक व्यय वहन करते हुए कार्य पूर्ण किए हैं। इसके बावजूद पूर्ण किए गए कार्यों के सापेक्ष देय धनराशि का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है।
यह स्थिति अब मात्र भुगतान में विलंब का विषय नहीं रह गई है, बल्कि ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी, बैंकिंग दायित्वों तथा उनके व्यवसायिक अस्तित्व से जुड़ा गंभीर वित्तीय संकट बन चुकी है। ठेकेदार लगातार संबंधित अधिकारियों एवं शासन स्तर पर अपने लंबित भुगतान के संबंध में अनुरोध करते आ रहे हैं। उन्हें बार-बार यह आश्वासन दिया जाता रहा है कि धनराशि उपलब्ध होते ही भुगतान कर दिया जाएगा, किंतु लगभग ढाई वर्ष बीत जाने के बाद भी इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
कहा कि एक ओर विभागीय स्तर पर कार्य शीघ्र पूर्ण कराने हेतु नोटिस, पेनल्टी, अनुबंध निरस्तीकरण, प्रतिभूति जब्ती एवं ब्लैकलिस्टिंग जैसी कार्यवाहियों की चेतावनी दी जाती है, वहीं दूसरी ओर ठेकेदारों के वैध देयकों का भुगतान वर्षों तक लंबित रखा जाता है। यह व्यवस्था प्रशासनिक संतुलन तथा अनुबंधीय दायित्वों की भावना के अनुरूप नहीं है। भुगतान में इस प्रकार की दीर्घ अवधि तक देरी के कारण ठेकेदारों पर बैंक ऋण एवं ब्याज, श्रमिकों की मजदूरी, सामग्री आपूर्तिकर्ताओं की देनदारी तथा अन्य वित्तीय दायित्वों का लगातार बोझ बढ़ रहा है। देय राशि पर बढ़ता वित्तीय भार ठेकेदारों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर रहा है और भविष्य में योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। मुख्यमंत्री ने जल जीवन मिशन की समीक्षा के दौरान आयोजित बैठक में योजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने तथा शेष कार्यों में तेजी लाने पर विशेष बल दिया था, किंतु यह अत्यंत खेदजनक है कि जिन ठेकेदारों ने अपने संसाधन लगाकर इन योजनाओं को धरातल पर उतारा है, उनके वर्षों से लंबित भुगतान के विषय को भी समान गंभीरता एवं प्राथमिकता के साथ संबोधित किया जाना आवश्यक था। जब तक ठेकेदारों की कार्यशील पूंजी उपलब्ध नहीं होगी और उनके पूर्व में किए गए कार्यों के वैध भुगतान का निस्तारण नहीं होगा, तब तक उनसे निरंतर नए कार्यों में अपेक्षित गति बनाए रखने की अपेक्षा करना व्यावहारिक नहीं है। इसके अतिरिक्त, अनेक योजनाओं में विलंब ठेकेदारों के नियंत्रण से बाहर के कारणों, जैसे वन विभाग की अनुमति, रेलवे से संबंधित अनुमति, भूमि संबंधी विषय, विभागीय स्वीकृति अथवा अन्य तकनीकी एवं प्रशासनिक कारणों से भी होता है। ऐसी परिस्थितियों में यदि बिना वस्तुनिष्ठ परीक्षण के सम्पूर्ण विलंब का दायित्व ठेकेदार पर डालकर दंडात्मक कार्यवाही की जाती है, तो यह न्यायसंगत नहीं होगा।

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