Latest news
महिला आरक्षण पर विशेष सत्र स्वागतयोग्य, कांग्रेसी प्रदर्शन ढोंगः महेंद्र भट्ट आपदा सुरक्षित उत्तराखण्ड के निर्माण में बड़ी पहल युवा राष्ट्रहित के लिए सदैव खड़े रहेंः डॉ. धन सिंह रावत प्रधानमंत्री आदर्श ग्राम योजना के तहत 14 ग्रामों के समग्र विकास पर जोर चारधाम यात्रा से खिलवाड़ पर सख्त कार्रवाई, भ्रामक वीडियो पर एफआईआर दर्ज टिहरी में नैल-कोटी कॉलोनी मार्ग पर वाहन दुर्घटना में आठ लोगों की मौत उपराष्ट्रपति ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया बदरीनाथ धाम के कपाट खुले, आस्था और उल्लास से गूंजा धाम मुख्यमंत्री धामी पहुंचे भारत के प्रथम सीमांत गांव माणा, विकास कार्यों का लिया जायजा मुख्यमंत्री धामी ने ग्राउंड जीरो पर उतरकर बद्रीनाथ धाम मास्टर प्लान की गहन समीक्षा की

[t4b-ticker]

Thursday, April 23, 2026
Homeउत्तराखण्डसीएम धामी ने हिमालय दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में सम्मेलन...

सीएम धामी ने हिमालय दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में सम्मेलन का किया शुभारंभ

देहरादून: हिमालय दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन में तीन दिवसीय सम्मेलन आज से शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सम्मलेन ने इस सम्मलेन का शुभारंभ किया I

इस दौरान परमार्थ निकेतन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विकास और आर्थिक दोनों ही जरूरी है। पर्यावरण संरक्षण के दायित्व को भी हमें महसूस करना है। हिमालय दिवस का अवसर बहुत महत्वपूर्ण है। देश और समाज के लिए आर्थिक और पर्यावरण दोनों जरूरी हैं। इन दोनों में संतुलन कायम करके ही हम हिमालय को बचा सकते हैं।

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि हमने प्रधानमंत्री और नीति आयोग से यह आग्रह किया है कि उत्तराखंड में हिमालयी राज्यों का एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाए। जिसमें इन तमाम मुद्दों पर सामूहिक चर्चा हो। हिमालय और जलवायु नियंत्रण महत्वपूर्ण विषय है। हवा, मिट्टी, जंगल और पानी का उत्तराखंड में भंडार है। हिमालय का संरक्षण और राष्ट्र के लिए प्राकृतिक स्रोत को बचाना भी हमारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। हमें प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन रोकना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इकोलाजी और इकोनामी दोनों को संतुलित रूप से लेना है। मौसम चक्र में लगातार बदलाव हो रहा है, वनस्पतियां विलुप्त होने के कगार पर हैं। इकोसिस्टम में तेजी से बदलाव हो रहा है, प्राकृतिक आपदाएं बढ़ रही हैं। हिमालय क्षेत्र में आने वाली आपदाओं का प्रभाव पूरे देश पर पड़ता है। हिमालय दिवस के अवसर पर हम सब को शुद्ध मन से यह मानना होगा कि हिमालय को बचाने के लिए हम सब कुछ करने के लिए तैयार रहेंगे।

इस दौरान परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने कार्यक्रम की जानकारी साझा की। इस वर्ष हिमालय दिवस की ‘थीम हिमालय एक जलवायु नियंत्रक’ रखी गई है। स्वामी चिदानंद ने कहा कि हिमालय भारतीय संस्कृति का रक्षक है। हमारी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के साथ ही हिमालय जैव विविधता का अकूत भंडार भी है। हिमालय केवल भारत ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए हिमालय का संरक्षण नितांत आवश्यक है। 

पर्यावरणविद् डॉ. अनिल जोशी ने बताया कि हिमालय प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से वायु, मिट्टी, जल, जंगल सहित भारत ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित करता है। बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के कारण वैश्विक स्तर पर तापमान में वृद्धि हो रही है, यह केवल भारत व एशिया ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए खतरे का कारण है। इसलिए मानव जगत को अपनी जीवन शैली में बदलाव करने की आवश्यकता है, ताकि हिमालय की सुरक्षा के साथ भावी पीढ़ियों का जीवन भी सुरक्षित किया जा सके।

RELATED ARTICLES
- Advertisment - 

Most Popular

Recent Comments