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Saturday, April 25, 2026
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उत्तराखंड में ग्रामीणों से खरीदा गया 5 करोड़ 42 लाख रुपए का पिरूल

गैरसैंण। उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण स्थित भराड़ीसैंण विधानसभा परिसर में बजट सत्र चल रहा है। आज सत्र का दूसरा दिन है। दूसरे दिन सदन के भीतर सरकार तमाम सवालों के जवाब दे रही है। इसी कड़ी में वनाग्नि को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी दी। विधानसभा में बजट सत्र के दूसरे दिन प्रश्नकाल में वन मंत्री सुबोध उनियाल ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि चीड़ के जंगलों में आग लगने के मूल कारण को खत्म करने के लिए ग्रामीणों से साल 2025 में 5,532 टन पिरूल (चीड़ की पत्ती) को खरीदा गया है। इस लक्ष्य को अब बढ़ाकर 8,555 टन कर दिया गया है। सरकार की मंशा है कि पिरूल एकत्रित कर आग की आशंका को न्यूनतम स्तर पर पहुंचाया जाए।
उत्तराखंड में वनाग्नि को रोकने के लिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिन गंभीर प्रयासों को शुरू किया गया है, उनसे सार्थक परिणामों की उम्मीदें बढ़ रही हैं। सुबोध उनियाल की मानें तो सरकार ने वन विभाग के माध्यम से एक साल के भीतर ग्रामीणों से 5 करोड़ 42 लाख रुपए का पिरूल खरीदा है। वनाग्नि को रोकने के लिए राज्य सरकार के प्रयासों में जनजागरूकता पर भी फोकस किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर धामी के निर्देश पर 1,239 जागरूकता कैंप लगाए गए हैं। सबसे अहम काम सरकार ने ये किया है कि ग्राम प्रधानों की अध्यक्षता में फॉरेस्ट फायर मैनेजमेंट कमेटी गठित की है, जो विभाग के साथ मिलकर जंगल बचाने में जुट रही हैं। इसके लिए संबंधित ग्राम पंचायत को 30 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
सुबोध उनियाल की मानें तो वनाग्नि के दौरान फायर वाचर्स महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी सुरक्षा के लिए सरकार ने पहली बार बीमा का सुरक्षा कवच उपलब्ध कराया है। फायर वाचर्स का 10 लाख रुपये का सामूहिक बीमा किया गया है। जबकि, 5,600 फायर वाचर्स ने पिछले साल वनाग्नि रोकने में अपना योगदान दिया था।
राज्य सरकार ने साल 2026-27 के बजट में पूर्व उपनल कर्मियों को समान कार्य के लिए समान वेतन उपलब्ध कराने की दिशा में अहम कदम भी उठाया है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बजट में इस मद के लिए 289 करोड़ 98 लाख 29 हजार रुपए की राशि का प्रावधान किया है। सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार कर्मचारियों और श्रमिकों के हितों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। पूर्व उपनल कर्मियों ने विभिन्न विभागों में लंबे समय तक अहम सेवाएं दी हैं और उनके हितों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ राज्य सरकार ने समान कार्य के लिए समान वेतन की व्यवस्था को लागू करने के लिए बजट में पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की है।

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